वर्ल्ड ओजोन डे 2021: विश्व ओजोन दिवस 2021 पृथ्वी पर कार्बन एवं इससे संबंधित हानिकारक गैसों जैसे- CFC, हेलोन-1301, क्लोरोफॉर्म,मिथेन, आदि के बढ़ते उत्सर्जन को लेकर विश्व के संगठनों की चिंताएं बढ़ने लगी है जिससे वायुमंडल में समताप मंडल के मध्य में स्थित ओजोन परत का क्षरण होने की समस्या सामने आयी है इसलिए पूरे विश्व में ओजोन क्षरण के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए प्रतिवर्ष 16 सितंबर 1995 से ओजोन डे मनाया जाता है।
विश्व ओजोन दिवस थीम
विश्व के संगठनों द्वारा ओजोन के क्षरण के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए प्रतिवर्ष एक थीम जारी की जाती है
विश्व ओजोन दिवस 2021 द्वारा जारी की गई थीम -"जीवन के लिए ओजोन – ओजोन परत संरक्षण के 36 वर्ष” है
2020 की थीम :- "जीवन के लिए ओजोन ओजोन परत संरक्षण के 35 वर्ष"
2019 की थीम :- "32 साल और चिकित्सा"
2018 की थीम :- "सूर्य के नीचे जीवन भर की देखभाल"
ओजोन स्तर क्षरण पर नियंत्रण के प्रयास
1.सर्वप्रथम 1974 में प्रो. शेरवुड रोलैंड ने ओजोन क्षरण की ओर ध्यान आकर्षित करने के पश्चात CFC एवं हेलोन ने यौगिको पर प्रतिबंध की मांग की|2. वर्ष 1885 में ओजोन स्तर के क्षय को रोकने के लिए वियना में प्रथम भूमंडलीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें CFC के उत्पादन तथा हेलोन गैसों की खपत समाप्त करने संबंधी विषय पर चर्चा हुई|
3. वर्ष 1987 में कनाडा में महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें CFC को चरणबद्ध रूप से नियंत्रित करना तथा CFC का उत्पादन बंद करना, इसका उत्पादन वर्ष 1998 तक कम कर 50% करना, आदि विषयो पेर निर्णय लिया गया |
4. वर्ष 1990 में ओजोन स्तर सुरक्षा के नाम से लंदन में एक संगोष्ठी आयोजित हुई जिसमें सभी देशों को CFC रहित करना है|
5. वर्ष 1992 में कोपेनहेगन में आयोजित संगोष्ठी में निर्णय लिया गया कि CFC का उपयोग पूर्णता बंद कर दिया जावे|
उपरोक्त संगोष्ठियों के निर्णय के उपरांत भी वैज्ञानिक विकास के लिए यह कहना कठिन है कि मनुष्य अपनी संतुलित एवं सुरक्षित स्थिति में लौट पाएगा या नहीं।
कहां पाई जाती है ओजोन परत ?
पृथ्वी की सतह से लगभग 800 से 1000 किलोमीटर की ऊंचाई तक वायु पाई जाती है। पृथ्वी के चारों ओर 800 से 1000 किलोमीटर तक 6 मंडल1.क्षोभ- मंडल (Troposphere)
2. क्षोभ सीमा (Tropopause)
3. समताप मंडल (stratosphere)
4. ओजोन मंडल (Ozonosphere)
5. आयन मंडल (Ionosphere)
6. बहिः मण्डल ( Exosphere)
वायुमंडल पाए जाते हैं समुद्र की सतह से 32 से 80 किलोमीटर तक ओजोन का आवरण या ओजोन मंडल होता है इसमें ओजोन गैस प्रचुर मात्रा में पाई जाती है इस मंडल में तापमान रहता है तथा आंधी तूफान नहीं आते हैं।
ओजोन परत का निर्माण
ओजोन परत सौरमंडल से आने वाली ऊर्जा का शोषण कर लेता है और ऑक्सीजन परमाणु में विखंडित हो जाता है यह परमाणु अन्य ऑक्सीजन परमाणु के साथ मिलकर ओजोन का निर्माण करता है ओज़ोन एक प्रकार से रासायनिक क्रिया के द्वारा बनती है इसके अंतर्गत प्रारंभिक अणु ऑक्सीजन होता है इसी के साथ एक अन्य प्रकाश रासायनिक क्रिया के द्वारा पराबैंगनी किरणों अवशोषण के द्वारा ओज़ोन विखंडित भी होती है वायुमंडल में ओजोन की कुल मात्रा 0.000002% ही है।यदि इस गैस को पृथ्वी की सतह पर फैलाया जाए तो केवल 3 मिलीमीटर परत बन पाएगी | इस गैस की 95% मात्रा केवल समताप मंडल एवं क्षोभ मंडल में पाई जाती है भूमि पर ओजोन की बहुत कम मात्रा पाई जाती है ओजोन उत्पादन की अधिकतम मात्रा भूमध्य रेखा के ऊपर पाई जाती है इस क्षेत्र में इस गैस की सांद्रता कम से कम होती है यहां पर उत्पादित ओजोन की मात्रा, वायु की तीव्र प्रभाव के कारण ध्रुवीय क्षेत्र की ओर चली जाती है समताप मंडल ओज़ोन अधिक जटिल प्रकाश रासायनिक क्रियाओं के कारण उत्पन्न होती है ओजोन गैस का अधिकांश भाग पृथ्वी से 15 से 40 किलोमीटर की ऊंचाई तक सांद्रित है लेकिन 32 किलो मीटर की ऊंचाई तक ओजोन की स्तर पाई जाती है क्योंकि इस गैस का निर्माण ना तो केवल 30 किलोमीटर के नीचे और ना ही 60 किलोमीटर के ऊपर होता है क्योंकि 60 किलो मीटर से ऊपर वायु दाब नहीं बनता जो कि ऑक्सीजन के संलयन के लिए आवश्यक होता है पृथ्वी की रक्षा कवच के रूप में कार्य करने वाली यह ओज़ोन स्तर हानिकारक विनाशकारी पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी के भाग में आने से अवरोधित करती है|
ओज़ोन परत से लाभ
ओजोन सूर्य से आने वाली पराबैगनी किरणों को पृथ्वी तक नहीं आने देती हैं, उसका वह शोषण कर लेती है जिसके कारण जीव जात को अनेक बीमारियों से सुरक्षा मिलती है जैसे- ◆ कैंसर जो बहुत ही घातक बीमारी हैं से बचाब,◆ मनुष्य की त्वचा की ऊपरी सतह की कोशिका क्षतिग्रस्त होने से बच जाती है
◆ निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, अल्सर नामक रोग से बचाब
◆ सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणों से आंखों की घातक रोग, मोतियाबिंद एवं घाव हो जाते हैं ।
◆तापमान में वृद्धि होती है ।
ओजोन स्तर का क्षरण
इससे आशय हैं कि समताप में उपस्थित ओजोन की मात्रा में कमी / हास् होना है| सूर्य की प्रकाश विकिरण एवं इंफ्रोरेड किरणे ऊर्जावान होने के कारण जीवों/ जीव जात को लाभकारी होती है लेकिन पराबैगनी किरणें जीव जात के लिए हानिकारक एवं मृत्यु कारक होती है| वैज्ञानिकों के अनुसार पराबैगनी किरणों की ऊर्जा जीवजात में जैव रासायनिक क्रियाओं की वृद्धि करती है तथा जीवन की उत्पत्ति भी जैव रासायनिक क्रियाओं पर आधारित है लेकिन जब तक पृथ्वी के ऊपर O2, N2,व O3 की एक प्रभावशाली परत नहीं बन पाई तब तक जीवन की उत्पति सम्भव नहीं हो पाई यह आवरण बन गया बेस ही पराबैगनी किरणों के प्रभाव में कमी और जीवन की उत्पत्ति सम्भव हुई|वर्तमान में पृथ्वी पर तीव्र गति से औद्योगीकरण एवं शहरीकरण के कारण एक समस्या उत्पन्न हो गई है क्योंकि जो आवरण कवच घातक पराबैगनी किरणों की ऊर्जा से मानव की रक्षा करता है उसको इन उद्योगों, परमाणु एवं आंतरिक परीक्षण के कारण वायुमंडल को दूषित कर दिया है इन मानव जनित योगिकों के उत्सर्जन के कारण ओजोन परत में उपस्थित ओजोन की मात्रा में कमी हो रही है जिससे सूर्य एवं अन्य ग्रहों से उत्पन्न पराबैगनी किरणें पृथ्वी के भू -भाग में पहुंचने लगी और इसके प्रभाव दिखाई देने लगे हैं|
ओजोन स्तर में क्षरण के कारण
1.क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) : वर्ष 1930 में अमेरिकी वैज्ञानिक डॉक्टर थॉमस मिजले ने अमेरिकी रासायनिक समिति के समक्ष क्लोरोफ्लोरोकार्बन का विश्लेषण प्रस्तुत किया यह पृथ्वी पर अधिक स्थिर है लेकिन जब यह समताप मंडल तक पहुंचती है, तब पराबैगनी किरणें विकिरण इसके रासायनिक बंधनों पर क्रिया क्लोरीन को मुक्त करती है, यह क्लोरीन से ऑक्सीजन के एक परमाणु को पृथक कर देती है और ओज़ोन को सामान्य ऑक्सीजन में परिवर्तित कर देती है| क्लोरीन इस क्रिया को निरंतर दोहराती है इस प्रकार CFC अणु ओज़ोन के हजारों अणु को नष्ट करती है | ऐसी लगभग 200 प्रकाश रासायनिक क्रियाएं होती है जो कि ओज़ोन की क्षति करती है| CFC का प्रत्येक अणुओं CO2 के अणुओं से 10000 गुना अधिक प्रभावी होता है जो भू-मंडल तापन करता है यह जलवायु को 20 प्रतिशत तापन करने के लिए उत्तरदायी है, और यह प्रतिशत धीरे-धीरे बढ़ रहा है | इस प्रकाश CFC गैस ओजोन गैस की क्षति के लिए उत्तरदायी है|2. ओजोन स्तर पर अनेक जैसे हेलोन- 1301, क्लोरोफॉर्म, कार्बन टेट्राक्लोराइड, मीथेन, एरोसॉल होम, CFC-11 आदि से ओजोन स्तर का क्षरण हो रहा है
3. ऐसा अनुमान है कि ज्वालामुखी के विस्फोट के कारण वायुमंडल में SO2 की मात्रा में वृद्धि हो जाने से ओज़ोन स्तर प्रभावित होगा।
4. मोटर वाहनों, दुपहिया वाहनों आदि एवं उद्योगों तथा कारखानों, ऊर्जा संयंत्र से निकलने वाले धुएं में पाई जाने वाली SO2, NOX, हाइट्रोकार्बन ,सीसा, कार्बन मोनोऑक्साइड आदि गैस ओज़ोन स्तर का क्षरण करती है|
5. अंतरिक्ष यान, जाट वायुयान के जले ईंधन में से निकलने वाली NO2 भी ओजोन स्तर का क्षरण करती है|
ओजोन स्तर के क्षरण के कारण ध्रुवी प्रदेशों में बहुत अधिक प्रभाव पड़ रहा है वर्ष 1987 में वैज्ञानिकों ने स्पष्टतया देखा कि अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन का स्तर इतना कम/ छीन हो गया कि वैज्ञानिकों ने यह माना कि ओज़ोन के स्तर में छिद्र हो गया| वर्तमान में ओजोन स्तर में छिद्र बनने के कारण पर अध्ययन, शोध कार्य चल रहा है, वर्तमान में उच्च स्तर के क्षरण के लिए CFC एवं हेलोन गैस को ही माना जा रहा है|
ओजोन क्षरण के प्रभाव
ओज़ोन स्तर के क्षरण के कारण निम्नलिखित प्रभाव पाए जाते हैं-1. मनुष्य की त्वचा की ऊपरी सतह की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती है क्षतिग्रस्त कोशिकाओं से हिस्टामिन नामक रासायनिक पदार्थ स्रावित होता है जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता समाप्त हो जाने से निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, अल्सर नामक रोग हो जाते हैं|
2. ओज़ोन के क्षरण के कारण सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से त्वचा का कैंसर हो जाता है
3. ओजोन स्तर के क्षणों से अनुवांशिक विसंगतियां, विकृतियां तथा चिरकालिक रोग उत्पन्न होंगे|
4. सूर्य से निकलने वाली पराबैगनी किरणें आंखों के घातक रोग सूजन, मोतियाबिंद हो जाते हैं
5. ओज़ोन के क्षरण से तापमान में वृद्धि हो रही है
6. ओज़ोन स्तर के क्षार के कारण सूक्ष्म जीवो एवं वनस्पतियों पेर भी हानिकारक प्रभाव हो रहा है वनस्पतियों में प्रोटीन की कमी, प्रकाश संश्लेषण क्रिया के साथ-साथ चयापचयिक प्रभावित होती है|
7. खाद्य श्रंखला प्रभावित होती है उत्पादक शैवाल नष्ट हो जाते हैं शैवालों के नष्ट हो जाने पर चलीय जीव जात- मछलियों, जलीय पक्षी, समुद्र में रहने वाले स्तनी प्राणी जैसे- व्हेल, सील और मानव भी प्रभावित होते हैं|


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