मंगलवार, 31 अगस्त 2021

मध्यप्रदेश में विन्ध्यन क्रम की चट्टानें (madhya pradesh gk in hindi )|

मध्यप्रदेश में विन्ध्यन क्रम की चट्टानें

(Rocks of Vindhya order in Madhya Pradesh)-gk in hindi


निचला विन्ध्यन क्रम (Lower Vindhryan System)

सेमरी उपक्रम (Semri Series)


  यह निचले विन्ध्यन क्रम की चट्टानों का एक उपक्रम है, जिसका अधिकांश विस्तार मध्य प्रवेश के उत्तर-पूर्व में सोन नदी धाटी में हुआ है। इस क्षेत्र में बलुआ पत्थर , चूना पत्थर तथा शैल आदि निक्षेप पाये जाते है। कच्चे माल की उपलब्धता के कारण इस क्षेत्र में समेन्ट उद्योग का विकास हुआ है।

    निचले विध्यन में वलय (Folds) और अंश (Faults) अधिक पाये जाते हैं। दमोह और सागर जिलों के दक्षिण में विस्तृत क्षेत्रों में गुम्बदाकार उच्च भूमियों एवं घाटियाँ जाती है।


ऊपरी विध्यन क्रम (Upper Vindhyan System)

इसका विकास निचले विध्यम क्रम की चट्टानों के बाद हुआ है। ऊपरी विध्यन क्रम की की चट्टानों का निर्माण  ज्वारन्दमुख  तथा नदियों की घाटियों में हुआ है। इसमें बलुआ पत्थर, शेल तथा कांग्लोमरेट चट्टानों की परते पायी जाती है। 
इसको तीन उपक्रमों में विभाजित किया है .


कैमूर उपक्रम (Kaimur Series) 

   इस उपक्रम का विस्तार मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा बिहार राज्यों में हुआ है। इसका सबसे अधिक विकास बुन्देलखण्ड और बधेलखण्ड के क्षेत्रों में हुआ है। इसमें मुख्य रूप से बलुआ,पत्थर ,शेल तथा कांग्लोमोट चट्टाने पायी जाती है।

राज्य में कैमूर उपक्रम का विस्तार पन्ना, सतना तथा रीवा जिलों में हुआ है। पन्ना जिले के पूर्वी भाग (बुन्देलखण्ड) में ग्रेनाइट चट्टानें पाई जाती हैं। पुलकोवा पहाड़ी के निकट स्थित केन एवं अन्य नदियों ने  कगारों का निर्माण किया है इन कगारों से कांलोमरेट चट्टानें दिखाई पड़ती है। इनसे शैल और  क्वॉर्टजाइट के निक्षेप पाये जाते हैं गृह निर्माण में किया जाता है। जिनका उपयोग गृहनिर्माण में किया जाता है।


रीवा उपक्रम (Rewa Series) 


इसका विस्तार कैमूर उपक्रम के उत्तर-पश्चिम में सागर, पन्ना तथा तमोह आदि जिलों में पाया जाता है। इस के मध्य में प्रयागराज (इलाहाबाद) से कटनी (मध्यप्रदेश) के मध्य रेल लाइन गुजरती है। इसमें उपस्थित बलुआ पत्थर की दो अवस्थाएँ पाये जाती हैं. इसके निचले शेल को पन्ना शेल और ऊपरी शेल को झिरी शेल (राजगढ़ किला) कहते हैं। पन्ना क्षेत्र से हीरा प्राप्त किया जाता है। .

इसके कण मध्यम से बड़े आकार के होते हैं एवं इनका रंग गुलाबीबैगनी  होता है। बड़े आकार में कणों की उपस्थिति के कारण यह अनुमान लगाया जाता है कि रीवा उपक्रम के निर्माण के समय जलवायु शुष्क रही होगी। इसमें बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, शेल आदि के निक्षेप जाते हैं जिनका उपयोग सीमेन्ट और शीशा उद्योग में किया जाता है।

भाण्डेर उपक्रम (Bhander Series) 


 भाण्डेर उपक्रम का विस्तार विध्यन श्रेणी के पश्चिम में सतना, सागर तथा दमोह जिलों के पठारी भागों में पाया जाता है।
 
इस उपक्रम की दो अवस्थाएँ है -

● गानौरगढ़ (Ganurgarti Shale) 

● सिरबू  शेल (Sirbu Shale)

इस उपक्रम की चट्टनों में चूना पत्थर, बलुआ  पत्थर, बलुआ पत्थर तथा शेल के निक्षेप पाये जाते हैं। इस क्षेत्र में सूक्ष्म से मध्यम आकार के कण गुलाबीबैगनी पत्थरों के पत्थरों के निक्षेप पाये जाते हैं जिनका उपयोग गृह निर्माण में सीमेंंट उद्योग में किया जाता है।

. विध्यन क्रम की चट्टानों में दरार और भ्रंश अधिक पाये जाते हैं। इन्हीं भ्रंशों तथा दरारों में आर्कियन चट्टाने है अवसादों के निक्षेप से इन चट्टानों का निर्माण हुआ। इनके संस्तर क्षैतिज अवस्था में पाये जाते हैं।




रविवार, 29 अगस्त 2021

MPPSC Exam Syllabus and pattern2021 - mppsctarget|

 

MPPSC Syllabus 


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राज्य सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 
             पाठ्यक्रम


      1.  प्रथम प्रश्न पत्र सामान्य अध्ययन


1. मध्यप्रदेश का इतिहास, संस्कृति एवं साहित्य 

●मध्यप्रदेश के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएँ प्रमुख राजवंश।

● स्वतंत्रता आन्दोलन में मध्यप्रदेश का योगदान।

●मध्यप्रदेश की प्रमुख कला एवं स्थापत्य कला।

● मध्यप्रदेश की प्रमुख जनजातियाँ एवं बोलियाँ। 
●प्रदेश के प्रमुख त्योहार लोक संगीत लोक कला एलोक-साहित्य।

● मध्यप्रदेश के प्रमुख साहित्यकार एवं उनकी कृतियाँ। ●मध्यप्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल।

●मध्यप्रदेश के प्रमुख जनजातिय व्यक्तित्व।

2.भारत का इतिहास


●प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के इतिहास की प्रमुख विशेषताएँ, धटनाएँ एवं उनकी प्रशासनिक, सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्थाएँ।

●19वी एवं 20वी शताब्दी में सामाजिक तथा धार्मिक सुधार आंदोलन ।

● स्वतंत्रता संघर्ष एवं भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन।

●स्वतंत्रता के पश्चात भारत का एकीकरण एवं पुनर्गठन ।

3.मध्यप्रदेश का भूगोल


● मध्यप्रदेश की वन, वनोपज, वन्यजीव, नदियों,पर्वत एवं पर्वत श्रृंखलाएँ ।

● मध्यप्रदेश की जलवायु

● मध्यप्रदेश के प्राकृतिक एवं खनिज संसाधन ।

● मध्यप्रदेश में परिवहन ।
● मध्यप्रदेश की प्रमुख सिंचाई एवं विद्युत परियोजनाएं।

● मध्यप्रदेश में कृषि, पशुपालन एवं कृषि आधारित उद्योग ।


4.भारत एवं विश्व का भूगोल


●भौतिक भूगोल:- भौतिक विशेषताएँ और प्राकृतिक प्रदेश |

●प्राकृतिक संसाधन:- वन, खनिज, संपदा, जल, कृषि, वन्यजीव, राष्ट्रीय उद्यान / अभ्यारण्य / सफारी ।

●सामाजिक भूगोल:- जनसंख्या सम्बन्धी/जनांकिकी   (जनसंख्या वृद्धि, आयु, लिंगानुपात, साक्षरता एवं आर्थिक गतिविधियां )।



 आर्थिक भूगोल:- प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधन (उद्योग, यातायात के साधन)।

 ● विश्व के महाद्वीप / देश/ महासागर / नदियाँ / पर्वत ।

● विश्व के प्राकृतिक संसाधन ।

● परंपरागत एवं गैर परपरागत ऊर्जा स्त्रोत ।

5. (अ) राज्य की संवैधानिक व्यवस्था-


● मध्यप्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था (राज्यपाल, मंत्रिमंडल विधानसभा,मध्यप्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतीराज एवं नगरीय प्रशासन व्यवस्था )

(ब) राज्य की अर्थ व्यवस्था-


● मध्यप्रदेश की जनानिकि एवं जनगणना

● मध्यप्रदेश का आर्थिक विकास।

● मध्यप्रदेश के प्रमुख उद्योग

● मध्यप्रदेश की जातियाँ, अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों तथा राज्य की प्रमुख कल्याणकारी योजनाएँ।।

6.भारत का संविधान शासन प्रणाली एवं अर्थ व्यवस्था -


●भारतीय शासन अधिनियम 1919 एवं 1935 ।

●संविधान सभा ।

● संघीय कार्यपालिका, राष्ट्रपति एवं संसद ।

● नागरिकों के मौलिक अधिकार कर्तव्य एवं राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत ।

● संवैधानिक संशोधन ।

● सर्वोच्च न्यायालय एवं न्यायिक व्यवस्था ।

● भारतीय अर्थव्यवस्था औद्योगिक विकास और विदेशी व्यापार, आयात एवं निर्यात ।
 
● वित्तीय संस्थाएँ – रिजर्व बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक, SEBI/NSE/ गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थान।

7. विज्ञान एवं पर्यावरण-


● विज्ञान के मौलिक सिद्धांत |

● भारत के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान एवं उनकी उपलब्धियों उपग्रह एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी

● पर्यावरण एवं जैव विविधता।

● पारिस्थितिकीय तंत्र

● पोषण आहार एवं पोषक तत्व

● मानव शरीर संरचना
 
● कृषि उत्पाद तकनीक

● खाद्य प्रसंस्करण।

● स्वास्थ्य नीति एवं स्वास्थ्य कार्यक्रम |

● प्रदूषण, प्राकृतिक आपदाएँ एवं प्रबंधन ।



2. द्वितीय प्रश्न पत्र -  सामान्य अभिरुचि परीक्षण

1. बोध्यगम्यता

2. संचार कौशल सहित अंतर - वैयक्तिक कौशल

3. तार्किक कौशल एवं विश्लेषणात्मक क्षमता.

4. निर्णय लेना एवं समस्या समाधान

5. सामान्य मानसिक योग्यता

6. आधारभूत सांख्यान (संख्याएँ एवं उनके संबंध, विस्तार का क्रम आदि- दसवी कक्षा का स्तर ) आँकड़ों का निर्वाचन (चार्ट, ग्राफ, तालिका ,आँकडों की पर्याप्तता आदि-दसवीं कक्षा का स्तर) हिन्दी भाषा में बोधगम्यता कौशल (दसवी कक्षा का स्तर)

टिप्पणी: दसवीं कक्षा के स्तर के हिन्दी भाषा के बोध्यगम्यता कौशल से संबंधित प्रश्नों का परीक्षण , प्रश्नपत्र में केवल हिन्दी भाषा के प्रकरणों के माध्यम से अंग्रेजी अनुवाद उपलब्ध कराए बिना किया जाएगा।


 राज्य सेवा मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम 


प्रथम प्रश्न पत्र (खण्ड-अ) इतिहास


इतिहास एवं संस्कृति


इकाई-1

भारतीय इतिहास भारत का राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास पास से 10 वीं शताब्दी तक ।

इकाई-2

11 वीं से 18 वीं शताब्दी तक भारत का राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास।

● मुगल शासक और उनका प्रशासन, मिश्रित संस्कृति का अभ्युदय ।
● ब्रिटिश शासन का भारतीय अर्थव्यवस्था एवं समाज पर प्रभाव |

इकाई-3

ब्रिटिश उपनिवेश के प्रति भारतीयों की प्रतिक्रिया:- कृषक एवं आदिवासियों का विद्रोह प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन/ संग्राम ।
भारतीय पुनर्जागरण :- राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन एवं इसके नेतृत्वकर्ता।।

● गणतंत्र के रूप में भारत का उदय ,राज्यों का पुनर्गठन, मध्यप्रदेश का गठन, स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात के प्रमुख घटनाएँ।

इकाई-4

● मध्यप्रदेश में स्वतंत्रता आंदोलन ।★★★

भारतीय सांस्कृतिक विरासत (मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ में):- प्राचीन काल सेे आधुनिक काल तक विभिन्न कला प्रारूपों, साहित्य, पर्व, (उत्सव) एवं वास्तुकला के प्रमुख पक्ष ।

● म.प्र. में विश्व धरोहर साल एवं पर्यटन ।

इकाई-5 

मध्यप्रदेश की प्रमुख रियासतें :- गोंडवाना, बुन्देली,  बघेली, होल्कर , सिंधिया एवं भीपाल रियासत (प्रारंभ से स्वतंत्रता प्राप्ति तक) ।

* वर्तमान मध्यप्रदेश के भौगोलिक संदर्भ में ।

         प्रथम प्रश्न पत्र (खण्ड - ब)


                     भूगोल


इकाई-1

विश्व का भूगोल

● प्रमुख भौतिक लक्षण पर्वत पर मैदान, नदियाँ झीले एवं हिमनद

● प्रमुख भौगोलिक घटनाएँ भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी क्रिया चक्रवात ।
● विश्व की जलवायु एवं वर्षा का वितरण एवं जलवायु प्रदेश: जलवायु परिवर्तन एवं उसके प्रभाव।

इकाई 2

भारत का भूगोल

प्रमुख भौतिक स्वरूप :- पर्वत, पठार, मैदान, नदियों, झीले एवं हिमनद 
● भारत के भू-आकृतिक प्रदेश ।

● जलवायु: मानसून की उत्पत्ति, एल नीनों, जलवायु एवं ऋतु,वर्षा का वितरण एवं जलवायु प्रदेश |

●प्राकृतिक संसाधन प्रकार एवं उपयोग

(क) जल, वन, मृदा 
(ख) शैल एवं खनिजः

●जनसंख्या वृद्धि, वितरण, घनत्व, लिंगानुपात, साक्षरता, प्रवास, ग्रामीण एवं नगरीय जनसंख्या ।

खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग :  संभावनाएं एवं महत्त्व, उद्योगों का स्थानीयकरण, उद्योग की पूर्ववर्ती एवं अग्रवर्ती आवश्यकताएँ, माँग पूर्ति प्रबन्धन ।


इकाई 3

मध्यप्रदेश का भूगोल


● प्रमुख भूआकारिकी (Geomorphic) प्रदेश- नर्मदा घाटी एवं मालवा  के पठार के विशेष संदर्भ मे ।

● प्राकृतिक वनस्पति एवं जलवायु ।

मृदा - मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुण, मृदा प्रसंस्करण एवं मृदा निर्माण मृदा क्षरण एवं ह्यस की समस्याएँ । समस्याग्रस्त मृदा एवं उसके परिष्कार के तरीके । जलग्रहण आधार  पर मृदा संरक्षण नियोजन ।

खनिज एवं ऊर्जा संसाधन -प्रकार ,वितरण एवं उपयोग।
प्रमुख उद्योग: कृषि उत्पादन ,वन एवं खनिज आधारित उद्योग ।

राज्य की जनजातियों आपदाग्रस्त जनजातियों के विशिष्ट संदर्भ में।

इकाई-4

जल एवं आपदा प्रबंधन


पेयजल - आपूर्ति जल की अशुद्धि के कारण एवं प्रबंधन ।
● जल प्रबंधन ।
● भू-जल एवं जल संग्रहण ।
● प्राकृतिक एवं मानव निर्मित आपदाएँ , आपदा प्रबंधन की अवधारणाऍ एवं विस्तार की सम्भावना, विशिष्ट खतरे एवं उनका शमन)

सामुदायिक योजना → संसाधन, मानचित्रण, राहत एवं पुनर्वास, निरोधक एवं प्रशासनिक उपाय, सुरक्षित निर्माण, वैकल्पिक संचार एवं जीवन - रक्षा हेतु दक्षता ।


इकाई 5 


भूगोल की आधुनिक तकनीक


● सुदूर संवेदन- सिद्धान्त, विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम, घटक, उपग्रहों के प्रकार , सुदूर संवेदन का उपयोग।

जी. आय. एस. (भौगोलिक सूचना प्रणाली)- घटक एवं उपयोग ।
● जी.पी.एस. (भौगोलिक पोजिशनिंग सिस्टम)- आधारभूत संकल्पना  उपयोग ।

           द्वितीय प्रश्न पत्र (खण्ड-अ)
      प्रश्नपत्र II -सामान्य अध्ययन


संविधान, शासन व्यवस्था, राजनैतिक एवं प्रशासनिक संरचना

इकाई-1

भारतीय संविधान - निर्माण, विशेषताएँ, मूल ढाँचा एवं प्रमुख संशोधन ।

वैचारिक तत्व- उद्देशिका, मूल अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व मूल कर्तव्य ।

● संघवाद, केन्द्रः- राज्य संबंध, उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय , स्थायिक पुनरावलोकन, न्यायिक सक्रियता, लोक अदालत एवं जनहित याचिका ।


इकाई 2

● भारत निर्वाचन , आयोग नियंत्रक एवं महा लेखा परीक्षक, सघ लोक सेवा आयोग, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग एवं नीति आयोग ।

● भारतीय राजनीति में जाति, धर्म, वर्ग, नृजातीयता, भाषा एवं लिंग की भूमिका, भारतीय राजनीति में राजनीतिक दल एवं मतदान व्यवहार, सिविल सोसायटी एवं जन आंदोलन,
राष्ट्रीय अखंडता तथा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे ।


इकाई 3

● संविधान के 73 वें एवं 74 वें संशोधन के संदर्भ में जनभागीदारी एवं स्थानीय शासन ।

● जवाबदेही एवं अधिकार- प्रतिस्पर्धा आयोग, उपभोक्ता फोरम, सूचना आयोग, महिला आयोग, मानव अधिकार आयोग  अजा/अजजा / अमिव आयोग, केन्द्रीय सतर्कता आयोग ।

● लोकतंत्र की विशेषताएँ:- राजनीतिक प्रतिनिधित्व, निर्णय प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी।

● समुदाय आधारित संगठन (CBO), गैर सरकारी संगठन (NGO) एवं स्व-सहायता समूह (SHG)

● मीडिया की भूमिका एवं समस्याएँ (इलेक्ट्रानिक प्रिन्ट एवं सोशल मीडिया) ।

इकाई - 4

भारतीय राजनीतिक विचारक

● कौटिल्य, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल ,राममनोहर लोहिया, डॉ. बी आर अम्बेडकर, दीनदयाल उपाध्याय, जयप्रकाश नारायण ।

इकाई-5

● प्रशासन एवं प्रबंधन- अर्थ, प्रकृति एवं महत्व, विकसित एवं विकासशील समाजों में लोग प्रशासन की भूमिका एक विषय के रूप में लोक प्रशासन का विका प्रशासन, लोक प्रशासन के सिद्धांत

● अवधारणाएँ:- शक्ति, सत्ता, प्राधिकारी, उत्तरादायित्व एवं प्रत्यायोजन (Delegation) ।

● संगठन के सिद्धांत पदसोपान नियंत्रण का क्षेत्र एवं आदेश की एकता

● लोक प्रबंधन के नवीन आयाम परिवर्तन का प्रबंधन एवं विकास प्रशासन ।


          द्वितीय प्रश्न पत्र (खण्ड ब ) 
        अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र

इकाई -1

● भारत में उग एवं सेवा क्षेत्र के मुद्दे एवं पहल ।

● भारत में राष्ट्रीय आय की गणना।

● भारतीय रिजर्व बैंक एवं व्यापारिक बैंकों में कार्य वित्तीय समावेशन, मौद्रिक नीति। 
● अच्छी कर प्रणाली की विशेषताएँ प्रत्यक्ष कर एवं अप्रत्यक्ष कर सब्सिडी नगद देन, राजकोषीय नीति।

● लोक वितरण प्रणाली , भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान प्रवृत्तियाँ एवं चुनौतियों गरीबी बेरोजगारी एवं क्षेत्रीय असंतुलन ।

● भारत का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार एवं भुगतान संतुलन, विदेशी पूंजी की भूमिका, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, आयात-निर्यात नीति, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, विश्व व्यापार संगठन, आसियान, सार्क, नामटा एवं ओपेक ।

इकाई-2 

मध्यप्रदेश के संदर्भ में:

● प्रमुख फसले, कृषि जोत क्षेत्र एवं फसल प्रतिरूप, फसलों के उत्पादन एवं वितरण का भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरणीय प्रभाव, बीज एवं खाद की गुणवत्ता एवं आपूर्ति से जुड़े मुदद्दे, कृषि के तरीके, उद्यानिकी, मुर्गीपालन, डेरी, मछली एवं पशुपालन आदि के मुद्दे एवं समस्याएँ, कृषि उत्पादन, परिवहन, भण्डारण एवं विपणन से संबंधित समस्याएँ एवं चुनौतियाँ।

● कृषि की कल्याणकारी योजनाएँ।

● सेवा क्षेत्र का योगदान ।

● मध्यप्रदेश का आधारभूत ढाँचा एवं संसाधन ।

● मध्यप्रदेश का जनांकिकी परिदृश्य और मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव।

● औद्योगिक क्षेत्र, संवृद्धि प्रवृत्तियाँ एवं चुनौतियाँ

● कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता, मानव संसाधन का नियोजन एवं उत्पादकता रोजगार के विभिन्न चलन (ट्रेड्स) |


इकाई - 3

मानव संसाधन विकास


शिक्षा - प्रारंभिक शिक्षा, उच्चशिक्षा एवं तकनीकी एवं चिकित्सकीय शिक्षा व्यवसायिक शिक्षा की गुणवत्ताएँ, बालिकाओं की शिक्षा ।
निम्नलिखित वर्गों से संबंधित सामाजिक मुददे एवं उनके कल्याणकारी कार्यक्रम:-  निःशक्त वर्ग, वृद्धजन, बालक, महिलाएँसामाजिक रूप से वंचित वर्ग, विकास परियोजनाओं के फलस्वरूप विस्थापित वर्ग ।


इकाई - 4

● सामाजिक समरसता के घटक, सभ्यता और संस्कृति की अवधारणा । भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ । संस्कार विविध : संदर्भ । वर्ण व्यवस्था । आश्रम, पुरुषार्थ, चतुष्ट्य । धर्म व मत पंथो का समाज पर प्रभाव, विवाह की पद्धतियाँ ।

सामुदायिक विकास कार्यक्रम, प्रसार शिक्षा, पंचायतीराज सामुदायिक विकास में गैर सरकारी संगठनों (NGO) की भूमिका , स्वसेवा के क्षेत्र में ग्रामीण विकास की नदीन प्रवृत्तियॉ, कुटुम्ब न्यायालय

इकाई-5

● जनसंख्या और स्वास्थ्य समस्याऐं, स्वास्थ्य शिक्षा एवं सशक्तिकरण, परिवार कल्याण कार्यक्रम, जनसंख्या नियंत्रण
● मध्यप्रदेश में जनजातियों की स्थिति ,सामाजिक संरचना, रीति-रिवाज, मान्यताएं, विवाह, नातेदारी ,धार्मिक ,विश्वास व परपराएँ, जनजातियों में प्रचलित पर्व व उत्सव ।

● महिला शिक्षा, पारिवारिक स्वास्थ्य, जन्म-मृत्यु समक, कुपोषण के कारण और प्रभाव पूरक पोषण हेतु शासकीय कार्यक्रम प्रतिरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी दखल-प्रतिरक्षण संक्रामक और असंक्रामक बीमारियों के उपचार |

विश्व स्वास्थ्य संगठन:- उद्देश्य, संरचना, कार्य एवं कार्यक्रम |

                    तृतीय प्रश्न पत्र
                विज्ञान एवं तकनीकी


●कार्य, बल एवं ऊर्जाः- गुरुत्वाकर्षण बल, धर्षण, वायुमंडलीय दबाव एवं कार्य।

● इकाइयॉ और माप, दैनिक जीवन के उदाहरण ।

● गति, वेग, त्वरण  ।
ध्वनि - परिभाषा, प्रसार का माध्यम श्रव्य और अश्रव्य ध्वनि, शोर और संगीत।

ध्वनि संबंधित शब्दावली आयाम, तरंग-लंबाई, कंपन की आवृत्ति ।

विद्युत - विभिन्न प्रकार के सेल, परिपथ 
चुंबक - गुण, कृत्रिम युवक का निर्माण एवं उपयोग ।

प्रकाश - परावर्तन, अपवर्तन दर्पण एवं लैस, प्रतिबिंध निर्माण।

ऊष्मा- ताप, मापन,थर्मामीटर ,ऊष्मा का रूपान्तरण ।

इकाई-2

तत्व यौगिक और मिश्रण:- परिभाषा, रासायनिक प्रतीक, गुण, पृथ्वी पर उपलब्धता ।

 ● पदार्थ, धातुएँ और अधातुएँ , आवर्त सारणी एवं आदर्तता।

● परमाणु परमाणु संरचना, संयोजकता बंध, परमाणु-सलयन और विखंडन

● अम्ल, क्षार और लवण, पीएच मान सूचक ।

● भौतिक और रासायनिक परिवर्तन।

● दैनिक जीवन में रसायन ।

इकाई-3

● सूक्ष्मजीव एवं जैविक कृषि

● कोशिका - संरचना एवं कार्य, जन्तुओं एवं पौधों का वर्गीकरण

● पौधों, पशुओं एवं मनुष्यों में पोषण, संतुलित आहार, विटामिन, हीनताजन्य रोग, हार्मोन्स , मानव शरीर के अंग संरचना एवं कार्य प्रणाली।

● जीवों में श्वसन  ।

● पशुओं और पौधों में परिसंचरण / परिवहन (ट्रांसपोटेशन)

● पशुओं और पौधों में प्रजनन ।

● स्वास्थ्य स्वच्छता एवं बीमारियों ।

इकाई 4

● कंप्यूटर की प्रकार विशेषता एवं  पीढ़ी (जनरेशन)। 
● मेमोरी इनपुट और आउटपुट डिवाइस, स्टोरेज डिवाइस, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर , ऑपरेटिंग सिस्टम, विंडोज, माइक्रोसॉफ्ट, ऑफिस के उपयोग।
● कंप्यूटर की भाषाएँ, कम्पाइलर, ट्रान्सलेटर, इन्टरप्रिटर तथा एसेम्बलर ।

● इन्टरनेट एवं ई-मेल

● सोशल मीडिया,

● ई- गवर्नेंस,
● विभिन्न उपयोगी पोर्टल और साइट और वेबसपेसेज ।

इकाई-5

● संख्याएँ एवं प्रकार इकाई मापने की विधिया, समीकरण एवं गुणनखंड, लाभ हानि, प्रतिशत , साधारण एवं चक्रवृद्धि ब्याज अनुपात -समानुपात ।

सांख्यिकी- प्रायिकता केन्द्रीय प्रवृत्ति (माध्य, माध्यिका एवं बहुलक ) एवं विचरणशीलता की माप प्रादर्श के प्रकार ।

इकाई-6

• संक्रामक रोग एवं उनकी रोकथाम ।

• राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम।

• आयुष (AYUSH) चिकित्सा पद्धतियों आयुर्वेद योग, यूनानी सिद्धया ,  होम्योपैथी  ,चिकित्सा पद्धतियों की प्रारंभिक जानकारी।।

● केन्द्र एवं राज्य शासन की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी कल्याणकारी योजनाएँ।

● केन्द्र एवं राज्य शासन के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संगठन

इकाई-7
 
● मानव जीवन पर विकास के प्रभाव स्वदेशी प्रौद्योगिकी की सीमाएँ

●  रिमोट सेंसिंग का इतिहास भारत में रिमोट सेलिंग
● भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केन्द्र, इंदौर (RRCAT), सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र , श्री हरि कोटा (SDSC) का अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), भाभा परमाण्विक अनुसंधान केन्द्र , मुम्बई (BARC), टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान ,मुम्बई (TIFR). राष्ट्रीय वायुमण्डलीय अनुसंधान प्रयोगशाला, तिरुपति (NARL) तरल प्रणोदन प्रणाली केन्द्र, बैंगलुरू (LPSC) ,अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र, अहमदाबाद (SAC), इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क, बैंगलुरू (IDSN), स्पेस साइस डाटा सेंटर, बैंगलुरू (ISSDC). विक्रम साराभाई अतरिक्ष केन्द्र तिरुवनन्तपुरम (VSSC) भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं तकनीकी संस्थान तिरुअनन्तपुरम (IIST), राष्ट्रीय सुदूर संवेदी केन्द्र हैदराबाद (NRSC), भारतीय सुदूर संवेदी संस्थान, देहरादून (IIRS). उक्त संस्थानों की सामान्य जानकारी।

● भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यानों की पीढ़ियों (जनरेशन)।

● जैव प्रौद्योगिकी - परिभाषा, स्वास्थ्य और चिकित्सा, कृषि, पशुपालन, उधोग और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में उपयोग ।
● क्लीन्स रोबोट्स एवं कृत्रिम बुद्धिमता ।

● बौद्धिक संपदा के अधिकार एवं पेटेंट (टिप्स, टिम्स) 
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय का योगदान डॉ. रमन ,हरगोविद खुराना, जगदीश चंद्र बसु ,होमी जहांगीर भाभा, एम. विश्वेशरैया ,श्री रामानुजन ,विक्रम साराभाई, एपीजे अब्दुल कलाम, सत्येन्द्र नाथ बोस, राजा रम्मना, प्रफुल्लचन्द्र रॉय ।

● विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार ।


इकाई 8

● ऊर्जा के पारंपरिक और गैर पारंपरिक स्रोत - अर्थ, परिभाषा, उदाहरण और अंतर 
● उर्जा दक्षता, ऊर्जा प्रबंधन, संगठनात्मक, एकीकरण, परिचालन कार्यों में ऊर्जा प्रबंधन ऊर्जा - क्रय उत्पादन उत्पादन योजना और नियंत्रण रख रखाव ।
● ऊर्जा रणनीतियों से संबंधित मुद्दे और चुनौतियॉ ।

● ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत- वर्तमान परिदृश्य और भविष्य की संभावनाएं सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा , महासागरीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा, जैव-ईधन आदि।

इकाई 9

● पर्यावरण की परिभाषा क्षेत्र एवं आयाम:- भौतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, मनोवैज्ञानिक आदि, भारतीय संदर्भ में पर्यावरण की अवधारणा आधुनिक विश्व में पर्यावरण की अवधारणा ।

● मानव गतिविधियों का पर्यावरण पर प्रभाव पर्यावरण से संबंधित नैतिकता और मूल्य जैवविविधता पर्यावरण प्रदूषण पर्यावरण- परिवर्तन ।

● पर्यावरण से संबंधित समस्याएं और चुनौतियाँ, पर्यावरणीय क्षरण के कारण और प्रभाव।
● पर्यावरण शिक्षा सार्वजनिक जन जागरूकता के कार्यक्रम, पर्यावरण शिक्षा एवं उसका स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंध ।
● पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी ऊर्जा का संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण के संवैधानिक प्रावधान। पर्यावरण संरक्षण नीतियों और नियामक ढाँचा |

इकाई 10

भू-गर्भशास्त्र की परिभाषा एवं महत्व पृथ्वी -भूपर्पटी, मेंटल, कोर, स्थलमंडल ,जलमंडल ,पृथ्वी की उत्पत्ति एवं आयु. भूवैज्ञानिक, समयसारणी, शैल (चट्टान) ,परिभाषा ,प्रकार- आग्नेय, अवसादीय, कायातरित ,शैले, खनिज एवं अयस्क, जीवाश्म अपक्षय एवं अपरदन, मृदानिर्माण, भूमिगतजल, प्राकृतिक कोयला, प्राकृतिक तेल एवं गैस ।

                 चतुर्थ प्रश्नपत्र

दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान एवं लोक प्रशासन

इकाई 1

दार्शनिक / विचारक, समाज सुधारक- सुकरात ,प्लेटो अरस्तू, महावीर बुद्ध, आचार्य शंकर, चार्वाक, गुरुनानक, कबीर, तुलसीदास, रवीन्द्रनाथ टैगोर, राजाराम मोहन राय, सावित्री बाई फुले, स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविन्द एवं सर्वपल्ली राधाकृष्णन ।



इकाई-2

मनोवृत्तिः विषयवस्तु ,तत्व,, प्रकार्य  : मनोवृत्ति का निर्माण मनोवृत्ति परिवर्तन, प्रबोधक, संप्रेषण, पूर्वाग्रह तथा विभेद, भारतीय संदर्भ में रुढ़िवादिता।

● अभिक्षमता एवं लोक सेवा हेतु आधारभूत योग्यताएँ, सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता एवं असमर्थकवादी वस्तुनिष्ठता, लोक सेवा के प्रति समर्पण, समानुभूति, सहिष्णुता एवं.. कमजोर वर्गों के प्रति संवेदना/करुणा ।

● संवेगिक बुद्धिः अवधारणा प्रशासन /शासन में इसकी उपयोगिता एवं अनुप्रयोगः ।

• व्यक्तिगत भिन्नताएँ।

इकाई-3

मानवीय आवश्यकताएँ एवं अभिप्रेरणा :

लोक प्रशासन में नैतिक सद्गुण एवं मूल्य- प्रशासन में नैतिक तत्व-सत्यनिष्ठा, उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता, नैतिक तर्क एवं नैतिक दुविधा तथा नैतिक मार्गदर्शन के रूप में अन्तरात्मा, लोक सेवकों हेतु आचरण संहिता, शासन में उच्च मूल्यों का पालन ।


इकाई 4

भ्रष्टाचार  - भ्रष्टाचार के प्रकार एवं कारण, भ्रष्टाचार का प्रभाव, भ्रष्टाचार को अल्पतम करने के उपाय, समाज, सूचनातंत्र, परिवार एवं व्हिसलब्लोअर (Whistleblower) की भूमिका, भ्रष्टाचार पर राष्ट्रसंघ की घोषणा ,भ्रष्टाचार का मापन, ट्रांसपरेंसी इन्टरनेशनल, लोकपाल एवं लोकायुक्त ।



इकाई 6

केस स्ट्डीज:- पाठ्यक्रम में सम्मिलित विषयवस्तु पर आधारित

                        पंचम प्रश्न पत्र

             सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण



इस प्रश्नपत्र का स्तर स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण छात्रा के समक्ष होगा। इसका उद्देश्य उम्मीदवार की पढ़ने व समझने, भाषीय दक्षता, लेखन की योग्यता एवं  हिन्दी में स्पष्ट तथा सभी विचार व्यक्त करने की क्षमता का मूल्यांकन करना है।

सामान्यतः निम्नलिखित विषय सामग्री पर प्रश्न पूछे जाएँगे।

(क) लघुत्तरीय प्रश्न -निर्धारित सम्पूर्ण पाठ्यक्रम के अंतर्गत  ही पूछे जाएंगे ।

(ख) अलंकार - शब्दालंकार - अनुप्रास , श्लेष , यमक ।
                       अर्थालंकार - उपमा ,रूपक ,उपेक्षा। 

ग) अनुवाद वाक्यों का - हिन्दी से अंग्रेजी एवं अंग्रेजी से हिन्दी।

(घ) (1) संधि एवं समास (2) विराम चिह्न।

(ड) प्रारंभिक व्याकरण एवं शब्दावलियाँ 

1. प्रशासनिक परिभाषिक शब्दावली (हिन्दी / अंग्रेजी

2. मुहावरे एवं कहावतें

3. विलोम शब्द

4. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

5. तत्सम एवं तद्भव शब्द

6. पर्यायवाची शब्द

7. मानक शब्दावली

(च) अपठित गद्यांश

(छ) पल्लवन-रेखांकित अथवा दी गई पक्तियों का भाव पल्लवन ।

(ज) संक्षेपण:- गद्यांश का एक तिहाई शब्दों में संक्षेषण।


                  षष्ठ प्रश्नपत्र
      हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन


 प्रथम निबंध (लगभग 1000 शब्दों में): निम्नांकित क्षेत्रों  से निपूछा जा सकता है। जैसे -पर्यावरण विज्ञान, धर्म-आध्यात्म, शिक्षा में गुणवत्ता, अधुनिकीकरण, भूमंडलीकरण, उदारीकरण, कृत्रिम बुद्धिमता, परम्परागत खेल ,संस्कृतिक विरासत , सभ्यता एवं संस्कृति, योग एवं स्वास्थ्य ई-मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, नेतृत्व एवं विकास, सुशासन,नोकरशाही, जनजातीय विकास, राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय एकता, सामुदायिक जीवन, सामाजिक सरोकार नवीकरणीय ऊर्जा , सतत विकास लक्ष्य ,  मादक पदार्थों का सेवन एवं दुष्प्रभाव, घरेलू हिंसा, बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे, व्यवसायगत सरलता आदि। (1000 शब्दों मे)

2. द्वितीय निबंध- समसामयिक समस्याएँ एवं निदान (लगभग 500 शब्दों मे) 

5. प्रारूप लेखन शासकीय व अर्धशासकीय पत्र, परिपत्र (सर्क्युलर), प्रपन्न, विज्ञापन आदेश पृष्ठाकन, अनुस्मारक (स्मरण पत्र) ,प्रतिवेदन (रिपोर्ट राइटिंग) ,अधिसूचना (नोटिफिकेशन), टिप्पण लेखन आदि (लगभग 250 शब्द) (कोई दो)


टीप:-  चूंकि इस प्रश्न पत्र का उद्देश्य ही अभ्यर्थी की हिन्दी भाषा की अभिव्यक्ति एवं उसके सामान्य हिन्दी के ज्ञान का परीक्षण करना है। अतः इस प्रश्न पत्र के उत्तर देने का माध्यम केवल हिन्दी रखा गया




शुक्रवार, 27 अगस्त 2021

गोडवाना क्रम की चट्टाने (Gondwana System of Rocks)- in hindi|

               गोडवाना क्रम की चट्टाने
      (Gondwana System of Rocks) 

 गोंडवाना क्रम की चट्टाने परतदार अवसादी चट्टाने है। इनका निर्माण मध्य कार्यानीफेरस काल से जुरैसिक  काल के अन्तिम चरण तक द्रोणी बेेसिनो में अवसादों तथा चट्टानों के वृहद निक्षेपण से हुआ है। भूगर्भिक हलचलों के कारण इस क्षेत्र के सघन वन मलबे के रूप में नीचे दब गये, जिनके अवसादीकरण के कारण कोयले का निर्माण हुआ।

इन चट्टानों का अध्ययन सर्वप्रथम  मध्य प्रदेश (दक्षिण-पूर्व) के प्राचीन गोंड राज्य में किया गया था। इसी आधार पर इन चट्टानों का नाम गोडवाना (Garidwana) रखा गया।

मध्य प्रदेश राज्य में गोंडवाना क्रम की चट्टानों में निम्न उपक्रम अथवा अवस्थाएँ पायी जाती है -


1. निचला गोंडवाना क्रम -

                (अ) तालचेर उपक्रम

2. ऊपरी गोंडवाना क्रम- 

                   (अ) महादेव उपक्रम
                   ( ब) जबलपुर उपक्रम
                 

 

निचला गोंडवाना उपक्रम (Lower Gondwana System)


तालचेर उपक्रम (Talcher Series) 

इसका नामकरण ओडिशा के अंगुक्त जिले में स्थितः तालचेर के नाम पर किया गया है। यहाँ कोयले के वृहद भण्डार है, जो ब्राह्मणी नदी घाटी क्षेत्र में स्थित है। इस उपक्रम के कोयले का विस्तार मध्य प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में स्थित सिंगरौली, सीधी तथा शहडोल आदि जिलों में पाया जाता है। ये शैलें जीवाश्मयुक्त होती हैं।

ऊपरी गोंडवाना क्रम (Upper Gondwana System)


महादेव उपक्रम (Mahadev Stries) 
     महादेव उपक्रम को पचमढ़ी उपक्रम के नाम से भी जाना
जाता है। पचमढ़ी, सतपुड़ा श्रेणी में स्थित है। महादेव उपक्रम में कोयले के भण्डार उपस्थित है, जिनका विस्तार छिंदवाडा, नरसिंहपुर तथा सिवनी आदि जिलों में पाया जाता है।
 
इसे दो अवस्थाओं में विभाजित किया गया है -
पचमढ़ी तथा मलेरी ।

जबलपुर उपक्रम ( Jabalpur Series )
    
इस उपक्रम का विकास मध्य प्रदेश के कटनी तथा जबलपुर के क्षेत्रों में हुआ है। 
इसकी दो अवस्थाएँ पायी जाती है -
 निचला चौगान तथा  ऊपरी जबलपुर 
   
 इस उपक्रम में जुरैसिक काल की वनस्पतियों के अवशेष पाये आते है। इस क्षेत्र में लिग्नाइट कोयले के साथ-साथ कांग्लोमरेट, बलुआ पत्थर, चूना पत्थर तथा शैल आदि के अवक्षेप पाये जाते हैं।


गुरुवार, 26 अगस्त 2021

धारवाड़ चट्टान (Dharwar Rock)|

     धारवाड़ चट्टान (Dharwar Rock)


धारवाड़ क्रम की चट्टानों का निर्माण आर्कियन नीस और शिस्ट शैलों के अनाच्छावन (Denudation) और अपरदन (Erosion) से प्राप्त अवसादों (Sediments) के निक्षेप (Deposit) से हुआ है।

सर्वप्रथम इन चट्टानों की खोज कर्नाटक के धारवाड़ जिले में की गई थी। ब्रुसफूट (Bruce Foote) द्वारा इन चट्टानों का नाम धारवाड़ (Dharwar) रखा गया है।

धारवाड़ क्रम की चट्टानों में स्लेट, शिस्ट, नीस ग्रेनाइट, फाइलाइट एवं क्वार्ट्जाइट आदि खनिजों की प्रधानता होती है।

ये चट्टाने जीवाश्म रहित होती है, परन्तु इनका आर्थिक महत्व अधिक होता है, क्योंकि इसमें कोबाल्ट, मैंगनीज, अभ्रक, क्रोमियम आदि के निक्षेप पाए जाते हैं।

मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्व में धारवाड़ क्रम की चट्टानों का विस्तार 3 समूहों में पाया जाता है

धारवाड़ क्रम की चट्टानें 

1. चिल्पी क्रम    

2.  सकोली क्रम                

3.   सौसर क्रम

चिल्पी क्रम (Chilpi Series) . चिल्पी क्रम की चट्टानों का विस्तार मध्य प्रदेश के बालाघाट ,जबलपुर तथा छिदवाड़ा जिलों में पाया जाता है। इन चट्टानों में फाइनाइट, क्वार्टजाइट, ग्रीन स्टोन तथा मैगनीज आदि के निक्षेप पाये जाते हैं।

             क्लोजपेट क्रम (Closepet  series)

 इन चट्टानों का विस्तार मध्य प्रदेश के बालाघाट तथा छिंदवाड़ा जिलों में पाया जाता है।

क्लोजपेट कम की चट्टानों में क्वार्ट्जाइट मैगनीज तथा कॉपर के पायराइट जाते हैं।

बालाघाट जिले में स्थित मलाजखण्ड (Malajkhand) ताँबे के वृहद भण्डार पाये जाते हैं।      【IMP Questions】


2. सकोली क्रम (Sako Series)


सकोली क्रम की चट्टानों का विस्तार मध्यप्रदेश राज्य के जबलपुर जिले में पाया जाता है। इसमें अभ्रक, शिस्ट तथा संगमरमर आदि के निक्षेप पाये जाते हैं। यहां सर्वोच्च गुणवत्ता का संगमरमर प्राप्त है।

3. सौसर क्रम (Sausar Series)


 इसका विस्तार महाराष्ट्र के नागपुर से मध्यप्रदेश छिंदवाड़ा जिले तक एक पट्टी के रूप में पाया है। इसमें अभ्रक, शिस्ट, संगमरमर, क्वार्टजाइट अधिकता पायी जाती है।


Violence against women during the partition(भारत के विभाजन के समय महिलाओं की स्थिति)|


भारत के विभाजन के समय महिलाओं की स्थिति




भारत के विभाजन के दौरान महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक व्यापक स्थिति थी। ऐसा अनुमान है कि विभाजन के दौरान 75,000 से 100,000 महिलाओं का अपहरण और बलात्कार किया गया था।




पहले के दंगों के विपरीत, कलकत्ता में प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस दंगों में महिलाओं को शिकार बनाया गया था। नोआखली हिंसा के दौरान कई हिंदू महिलाओं का अपहरण कर लिया गया था।

1946 में बिहार में मुसलमानों के नरसंहार के दौरान महिला विरोधी हिंसा हुई थी। हजारों का अपहरण सिर्फ पटना जिले में किया गया था। बिहार में मुस्लिम महिलाओं ने कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली.

मार्च 1947 में रावलपिंडी जिले में महिलाओं के खिलाफ व्यवस्थित हिंसा शुरू हुई, जहां मुस्लिम भीड़ ने सिख महिलाओं को निशाना बनाया।

आगे के हमलों से पहले कई सिख महिलाओं ने सम्मान बचाने और धर्मांतरण से बचने के लिए पानी के कुओं में कूदकर आत्महत्या कर ली।

अपहृत महिलाओं के सटीक आंकड़े अज्ञात हैं और अनुमान अलग-अलग हैं। भारत सरकार ने अनुमान लगाया कि पाकिस्तान में 33,000 हिंदू और सिख महिलाएं थीं और पाकिस्तानी सरकार का अनुमान है कि भारत में  50000 मुस्लिम महिलाओं का अपहरण किया गया था।

6 दिसंबर, 1947 को इस उद्देश्य के लिए एक अंतर-डोमिनियन संधि पर हस्ताक्षर किए गए और कार्यक्रम को सेंट्रल रिकवरी ऑपरेशन कहा गया, जिसमें शामिल थे महिला सामाजिक कार्यकर्ता और पुलिस।

इसके लिए 1949 में अपहृत व्यक्ति (वसूली और बहाली) अधिनियम भी पारित किया गया था। इस अधिनियम के तहत, एक तारीख तय की गई और 1 मार्च, 1947 के बाद महिलाओं के धर्मांतरण और विवाह को मान्यता नहीं दी गई, जबकि इन महिलाओं को अपहृत व्यक्ति माना गया।

भारतीय और पाकिस्तानी सैन्य निकासी संगठनों की स्थापना महिलाओं को उनके संबंधित देशों में सुरक्षा और अनुरक्षण के लिए की गई थी।

कई महिलाओं ने अपने परिवारों और समुदायों द्वारा शर्मिंदा और खारिज किए जाने के डर से ठीक होने से भी इनकार कर दिया, जबकि कुछ महिलाओं ने अपने नए 'परिवारों' के साथ तालमेल बिठा लिया और इसलिए लौटने से इनकार कर दिया।

गर्भवती महिलाओं को या तो अपने बच्चों को गोद लेने के लिए देना पड़ता था या गर्भपात या 'सफाई' के लिए जाना पड़ता था, जैसा कि इसे कहा जाता था। हालांकि भारत में गर्भपात अवैध था, सरकार ने इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से सामूहिक गर्भपात को वित्तपोषित किया।

1954 तक दोनों सरकारें इस बात पर सहमत हुईं कि महिलाओं को जबरन स्वदेश नहीं भेजा जाना चाहिए


आध महाकल्प/आर्कियन समूह (anrchean System) - gk in hindi |

आध महाकल्प/आर्कियन समूह (anrchean System)



आर्कियन का शाब्दिक अर्थ है, सर्वाधिक प्राचीन। इस समूह की चट्टाने प्रायद्वीपीय भारत के दो तिहाई भाग में राजस्थान से कन्याकुमारी तक विस्तृत हैं। मध्य प्रदेश के उत्तरउत्तर-पश्चिम तथा पूर्वी भाग में आर्कियन चट्टानों का विस्तार अधिक है। इन चट्टानों में मुख्यत: में ग्रेनाइट, चानोंकाइट ( Charnockite) शिस्ट तथा नीस (Gneiss) आदि खनिज पाये जाते हैं।

        
आर्कियन चट्टान : पृथ्वी पर निर्माण के समय

आर्कियन चट्टानों का निर्माण


◆ द्रवित पदार्थ के शीतलन और दृढ़ीकरण या घनीभवन

(Solidification) से।

◆ आद्य सागरों में संग्रहित प्रथम अवसादो शिलाओं के रूप में इनका तापीय तथा प्रादेशिक रूपान्तरण हुआ है।

. मैग्मा अथवा लावा के अंतर्भेद (Intrusive) या उद्भेदन के पश्चात् रूपान्तरण के फलस्वरूप शिस्ट एवं नी जैसी चट्टानों का निर्माण हुआ है।

        आर्कियन चट्टानों का रूपान्तरण इतना अधिक हुआ है कि, इनकी मूल विशेषताएँ लगभग समाप्त हो चुकी हैं। ये चट्टानें जीवहीन (Azoic) एवं जीवाश्म रहित होती हैं, इससे प्रमाणित होता है कि इनके विकास के समय पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व नहीं था। ये आर्कियन चट्टानें अत्यधिक आकुचित हैं, क्योंकि ये प्रशित एवं शल्कित (Follated) अवस्था में हैं। इनमें मुख्य रूप से नीस, शिस्ट, ग्रेनाइट, फाइलाइट खोन्डेलाइट, पेग्मेटाइट, संगमरमर तथा क्वार्ट्जाइट आदि खनिजों के निक्षेप पाये जाते हैं। रुपान्तरण के कारण ग्रेनाइट, नीस में परिवर्तित हो जाता है। जिसे बंगाल गुम्बद अथवा गुम्बद नाइस (Dome Gneiss) कहते हैं। इसकी संरचना शल्कि (Foliated) तथा पट्टी के रूप में पायी जाती है। इसलिए इन्हें पैतृक चट्टाने अथवा प्राथमिक चट्टाने (Primary Rocks)
भी कहते हैं।

          प्रायद्वीपीय नीस


प्रायद्वीपीय नीस एक प्रमुख आर्कियन चट्टान है, इन्हें कणों के आधार पर बुन्देलखण्ड नौस तथा चार्नोकाइट नीस आदि नामों से भी जाना जाता है।

बुन्देलखण्ड नीस :

       यह आर्कियन क्रम की चट्टान से निर्मित है, जिसके कणों का आकार वृहत् (Macro) होता है। यह ग्रेनाइट के समान दिखाई पड़ती है। इसका विस्तार मध्य प्रदेश के अतिरिक्त महाराष्ट्र, राजस्थानतमिलनाडु तथा आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में हुआ है।

चार्नोकाइट नीस :

    इन चट्टानों के कणों का आकार सूक्ष्म (Micro) होता है। इन चट्टानों को नीलगिरी नोस भी कहते हैं, क्योंकि इसका रंग गहरा तोला से भूरा होता है। इसका नामकरण कोलकाता के संस्थापक जॉब चानोंक के नाम पर किया गया है। चार्मोकाइट नोस का विस्तार मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा झारखण्ड आदि राज्यों में हुआ है।


आर्कियन समूह की चट्टानें खनिज सम्पदा की दृष्टि से भारत की सबसे समृद्ध चट्टानें हैं। इनमें धात्विक,अधात्विक खनिजों के अतिरिक्त दुर्लभ खनिज (Rare Mineral), बहुमूल्य रल, तांबा, मैगनीज, लोहा ,अभ्रक आदि के निक्षेप पाये जाते हैं।


इन्हें भी देखे

● धारवाड़ क्रम 


● मध्यप्रदेश की चट्टानें क्विज


बुधवार, 25 अगस्त 2021

Rocks of Madhya Pradesh quiz (मध्यप्रदेश की चट्टानें क्विज)-Gk in hindi |

Rocks of Madhya Pradesh Quiz

(मध्यप्रदेश की चट्टानें)-Gk in hindi



1. मध्यप्रदेश में गोंडवाना युग की चट्टानें निम्न क्षेत्र में मिलती हैं

(अ) सतपुड़ा क्षेत्र में

(ब) मध्य भारत क्षेत्र में

(स) मालवा क्षेत्र में . 

(द) बुदेलखण्ड क्षेत्र में


Ans : अ

2. म.प्र. भू-वैज्ञानिक दृष्टि से किसका भाग है


(अ) विध्यन शैल

(ब) गोडवाना लैण्ड

(स) दक्कन ट्रेप 

(द) इनमें से कोई नहीं

Ans : ब

3. म.प्र. में धारवाड क्रम की चट्टानें कहीं नहीं पाई जाती हैं

(अ) जबलपुर

(ब) बालाघाट

(स) खण्डवा

(द) रीवा 

Ans  : स

4. म.प्र. में कुडप्पा क्रम की चट्टानें कहाँ पायी जाती है

(अ) बिजावर

(ब) पन्ना

(स) छतरपुर 

(द) उपरोक्त सभी 

Ans : द

 5. म.प्र. के किस जिले में धारवाड़ शैल को सौंसर सीरीज के नाम से जाना है?

(अ) छिंदवाड़ा

(ब) शहडोल

(स) बैतूल

(द) बालाघाट


Ans : अ

6. म.प्र. के बालाघाट जिले में पायी जाने वाली धारवाड़ शैल समूह को किस सीरीज की संज्ञा दी जाती है।

(अ) सौसर सीरीज

(ब) चिपली सीरीज

(स) संकोली सीरीज

 (द) इनमें से कोई नहीं


Ans : स

7. निम्न से किसे गंगा तथा नर्मदा का जल विभाजक माना जाता है?

(अ) कैमूर कगार1

(ब) भाण्डेर कगार

(स) दोनों

(द) इनमें से कोई नहीं

Ans :  स

8. देश की भूवैज्ञानिक संरचना के अंतर्गत का अधिकांश भाग निर्मित है ?

(अ) मैदानी

(ब) पठारी

(स) पर्वतीय

(द) इनमें से कोई नहीं


Ans :  ब

9. धारवाड़ समूह की चट्टानें मुख्यतः पाई जाती हैं

(अ) जबलपुर

(ब) बालाघाट

(स) छिंदवाड़ा

(द) उपयुक्त सभी

Ans :  द

 10. सौसर सीरीज पाई जाती है

(अ) धारवाड़ समूह में

(ब) कडप्पा समूह में

(स) विन्ध समूह में

(द) इनमें से कोई नहीं

Ans : अ


11. राज्य में सबसे प्राचीनतम चट्टानें हैं.

(अ) आर्कियन

(ब) कडप्पा

 (स) विध्य

(द) गोंडवाना


Ans : अ


12. म.प्र. में विन्ध्य क्रम की चट्टानें कहाँ पायी जाती हैं?

(अ) रीवा

(ब) पन्ना

(स) छतरपुर

(द) उपरोक्त सभी

Ans : अ

13.  जलज चट्टानों का समूह है

(अ) आर्य समूह में

(ब) विंध्य समूह में

(स) कड़प्पा समूह में 

(द) गोंडवाना समूह में


Ans : अ

14. राज्य की पेंच घाटी शैल समूह में पाई जाती हैं

(अ) आर्य समूह में

(ब) विध्य समूह में

(स) कड़प्पा समूह में

(द) गोंडवाना समूह में

Ans : द

15. बाघ सीरिज किस शैल समूह की है

(अ) क्रिटेशियस 

(ब) कड़प्पा समूह में

 (स) विंध्य समूह में

(द) गोंडवाना समूह में

Ans : अ

16. मध्यप्रदेश के भूवैज्ञानिक जुराक्सिक काल के जीवाश्म
     कहाँ से प्राप्त हुए हैं

(अ) जबलपुर

(ब) इन्दौर

(स) भोपाल

(द) देवास

Ans : अ

17. तृतीयक शैल समूह मध्यप्रदेश में कहां पाया जाता हैं

(अ) दक्षिण-पूर्व

(ब) उत्तर-दक्षिण

(स) मध्य 

(द) उपरोक्त में कोई नहीं 

Ans : अ

18. नर्मदा सोन घाटी का निर्माण किस शैल समूह में हुआ

(अ) तृतीयक समूह में

 (ब) विध्य समूह में

(स) कडप्पा समूह में

 (द) गोंडवाना समूह में

Ans :अ

19. किस शैल समूह में बालुका पत्थर मिलते हैं

(अ) तृतीयक समूह में 

(ब) विध्य समूह में

(स) कड़प्पा समूह में

(द) गोंडवाना समूह में

Ans : द

20. किस शैल समूह में स्लेट और फाईलाइट मिलते हैं.

(अ) धारवाड़ समूह में

 (ब) विध्य समूह में

(स) कड़प्पा समूह में

(द) गोंडवाना समूह में

Ans : अ


इन्हें भी देखे 




मंगलवार, 24 अगस्त 2021

Land Structure of Madhya Pradesh quiz(मध्यप्रदेश की भू - संरचना क्विज )|

Land Structure of Madhya Pradesh quiz
        (मध्यप्रदेश की भू - संरचना क्विज )|



1. भौतिक बनावट की दृष्टि से वर्तमान मध्यप्रदेश को कितने
भौतिक प्रदेश में बांटा गया है।

(अ)  एक

(ब)   दो

(स) तीन

(द) चार

Ans : स

 2. भौतिक बनावट की दृष्टि से मध्यप्रदेश तीन भौतिक प्रदेश में विभाजित किया गया है निम्न में से कौन सा मध्यप्रदेश का भौतिक प्रदेश नहीं है।

(अ) मध्य उच्च प्रदेश

(ब) सतपुड़ा मैकल श्रेणी प्रदेश

(स) पूर्वी पठार

(द) मालवा का पठार 



Ans : स

3. विन्ध्य कगारी प्रदेश के नाम से जाना है

(अ) रीवा-पन्ना प्रदेश

  (ब) नर्मदा धाटी
  
(स) बघेलखण्ड का पठार

(द) मध्यभारत 


Ans : अ

4. मध्यप्रदेश में राजस्व मण्डल का मुख्यालय कहाँ पर स्थित है।

(अ) ग्वालियर

(स) इन्दौर

(ब) भोपाल

(द) जबलपुर

Ans : अ

5. मध्य उच्च प्रदेश को कितने उप-विभागों में बांटा गया?

(अ) 5 उप-विभाग
 (ब) 3 उप विभाग

 (स) 4 उप-विभाग
 (द) 2 उप-विभाग)


Ans : अ

6. मध्यप्रदेश के राज्य चिह्न में सबसे बाहर स्तूपों की संख्या कितनी है

(अ) 12
(ब) 18

(स) 22 
(द) 24

Ans : द


7. मध्य भारत की राजधानी थी?

(अ) ग्वालियर एवं इन्दौर

 (ब) देवास एवं उज्जैन

(स) महेश्वर एवं उज्जैन,

(द) धार एवं उज्जैन

Ans : अ

8. महाराष्ट्र को मध्यप्रदेश के गठन के समय कितने जिले (मराठी भाषी) दिए गए थे?

(अ) आठ

(ब) सात

(स) नो

(द) दस


Ans : अ

9. भोपाल राज्य के पहले मुख्यमंत्री कौन थे?

 (अ) नवाव हसन सिटी

 (ब) श्री शंकरदयाल शर्मा

(स) विजय शंकर उपाध्याय

 (द) पंडित रविशंकर शुक्ल


Ans: ब

10. महाकौशल क्षेत्र किस स्टेट में शामिल था?

(अ) स्टेट ए

 (ब) स्टेट-सौ

(स) स्टेट बी 

(द) स्वयं एक स्टेट

Ans: अ

11. निम्न पठारों में से किस पठार का निर्माण ज्वालामुखी
उद्गार से निकले लावे से हुआ है?


(अ) मालवा का पठार

(स) बघेलखण्ड का पठार

(च) बुन्देल खण्ड़ का पठार 

(द) रीवा-पन्ना का पठार

Ans : अ

12. मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ के गठन के पश्चात् कितने जिले थे.

(3) 45

(ब) 48

(स) 61

(द) 43 


Ans : अ

13. मध्यप्रदेश का सबसे पश्चिमी जिला कौन-सा है


(अ) सीधी

(ब) मुरैना

(स) झाबुआ

(द) अलीराजपुर


Ans : द

14.  मध्यप्रदेश का सर्वोच्च शिखर धूपगढ़ किस पठार में स्थित है?

(अ) मालवा का पठार

(ब) सतपुड़ा का पठार

(स) नर्मदा-सोन की घाटी

(द) बुंदेलखंड का पठार

Ans : ब



15. धूपगढ़ किस पहाड़ी पर स्थित है?


(अ) महादेव पर्वत

(ब) राजपीपला

(स) मैकल पर्वत

 (द) इनमें से कोई नही


Ans : अ


 16. सिद्ध बाबा पहाड़ी निम्न पठारों में से किस में स्थित है

(अ) बघेलखण्ड

(ब) रीवा-पन्ना 

(स) सतपुड़ा

(द) बुंदेलखंड


Ans : द

17. अलीराजपुर जिला विधिवत् रूप में कब अस्तित्व में
     आया?

(अ) 5 मई 2008 
(ब) 17 मई 2008

(स) 9 मई, 2008)
 (द) इनमें से कोई नहीं

Ans : ब

18. नवीन जिलों के गठन के बाद अब प्रदेश की ऊर्जा राजधानी कौन-सा जिला कहलायेगा?

(अ) सिंगरौली

(ब) सुहागपुर

(स) अलीराजपुर 

(द) सीधी


Ans : द

19. राज्य पुनर्गठन से पूर्व म.प्र. को किन किन नामों से जाना
जाता था ?

(अ) ब्रिटिश शासनकाल में सेन्ट्रल प्रॉविन्सेज एवं दरार

(3)  सेण्ट्रल इण्डिया

(स) पश्चिम की रियासतों को मध्य भारत

(द) उपरोक्त सभी


Ans : द

20. वर्तमान में म.प्र. में जिलों की संख्या कितनी हैं?

(अ) 45

(ब) 48

(स) 51

(द) 52 


Ans: द

21. किन जिलों का समूह बुंदेल खण्ड क्षेत्र में आता है

(अ) मंदसौर, राजगढ़, शिवपुरी

(ब) टीकम्पगढ़, दमोह, उत्तरपुर 

(स) दुर्ग, रायपुर, राजनांदगाँव

(द) रीवा, शहडोल, सतना।


Ans : ब

 22. पुनर्गठन से पूर्व भोपाल किसका भाग था?

(अ) एस्टेट का भाग

(ब) सी स्टेट का भाग

 (स) बी स्टेट का भाग

(द) एक पृथक स्टेट


Ans : ब

23. सही कथन को छाँटिए- 


(अ) स्टेट- ए की राजधानी रीवा थी

(ब) स्टेट-सी को मध्य भारत नाम दिया गया।

(स) स्टेट-बी में बघेल खण्ड को सम्मिलित किया गया

(द) स्टेट-बी की दो राजधानियाँ थी 

Ans : द

24. निम्न में से कौन मध्यप्रदेश का उपनाम नहीं है?

(अ) हृदय प्रदेश

(ब) टाइगर स्टेट

(स) सोया राज्य

(द) अन्न प्रदेश

Ans: द

25. भोपाल राज्य की स्थापना किसके द्वारा की गई थी

(अ) गोस मोहम्मद खान

 (ब) बेगम सुल्तान जहाँ

(स) बेगम शारजहां

(द) दोस्त मोहम्मद खान


Ans : द

26. मध्यप्रदेश राज्य है?

(अ) समुद्री सीमा से घिरा राज्य

 (ब) पूर्ण भू-आवेष्ठित राज्य

(स) अंतर्राष्ट्रीय रेखा को छूने वाला

(द) उपरोक्त सभी

Ans : ब

27. मध्य प्रदेश के गठन के संबंध में गलत कथन बताइये-

(3) महाकौशल की राजधानी जबलपुर थी

(ब) बुलढ़ाना, अकोला सहित आठ जिलों को तत्कालीन मुम्बई राज्य में सम्मिलित कर दिया गया।

(स) तत्कालीन संपूर्ण विध्यप्रदेश को मध्यप्रदेश में मिलाया गया।

(द) मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील को तत्कालीन राजस्थान को दे दिया गया।


Ans : द

28. मध्यप्रदेश का नया संभाग नर्मदापुरम किस तिथि को अपने अस्तित्व में आया?

(अ) 1 अप्रैल 2008

 (ब) 22 जुलाई 2008 

(स) 2 सितम्बर 2008

(द) 27 अगस्त 2008


Ans : द

29. सीधी एवं झाबुआ में सूर्योदय के समय पर विचार कीजिए एवं सही विकल्प चुनिए


(अ) सांधी में सूर्योदय 1 घंटे पहले होगा

(ब) झाबुआ में सूर्योदय 1 घंटे पहले होगा

(स) सीधी में सूर्योदय 1/2 घंटे पहले होगा

 (द) झाबुआ में सूर्योदय 1/2 घंटे पहले होगा


Ans : स

30. म.प्र. के 2003 में नवनिर्मित जिलों में शामिल हैं

(अ) सीधी

(स) बड़वानी

(ब) हरदा

(द) बुरहानपुर

Ans : द

31. मध्यप्रदेश के तीन प्रमुख जिले कौन से है, जो कर्क के सबसे अधिक समीप है

(अ) इन्दौर, जबलपुर, भोपाल

(४) रायगढ़, विदिशा, मण्डला

(स) उज्जैन, रतलाम, राजगढ़

 (द) शिवपुरी, छतरपुर, रीवा

Ans : स

32. निम्न समितियों जिलों के पुनर्गठन से संबंधित हैं

(अ) बी. आर. दुबे समिति

(ढ) एम.एस. सिंह देव समिति

(स) (अ) और (ब) दोनों

(द) इनमें से कोई नहीं

Ans : स


इन्हें भी देखें 


◆ मध्यप्रदेश की भू - सरंचना quiz

◆ धारवाड़ क्रम की चट्टान

◆ आर्कियन  क्रम की चट्टान