सोमवार, 16 अगस्त 2021

Madhya pradesh mein 1857 ki kranti in hindi |(मध्यप्रदेश में 1857 ई. की क्रांति)

मध्यप्रदेश में 1857 ई. की क्रांति


1857 के विद्रोह में मध्य प्रदेश का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रदेश में यह विद्रोह 3 जून, 1857 को नीमच छावनी से पैदल और घुड़सवार सैनिकों के द्वारा प्रारम्भ हुआ, किन्तु कर्नल सी. बी. सोबर्स ने उदयपुर के राजपूत सैनिकों की सहायता से नीमच के किले एवं निम्बाहेड़ा पर अधिकार बकर इस विद्रोह को समाप्त कर दिया।

शेख रजमान के नेतृत्व में अश्वारोही सैन्य टुकड़ी ने सागर में विद्रोह किया, और शंकरशाह तथा उनके पुत्र ने गढ़ा मण्डला, राजा ठाकुर प्रसाद ने राघवगढ़, ने श्री बहादुर और देवी सिंह ने मण्डला तथा जमींदार नारायण सिंह ने रायपुर में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया।

●20 जून, 1857 को शिवपुरी में विद्रोह के पश्चात् बुन्देलखण्ड के स्थानीय सैनिकों ने भी विद्रोह किया। इस विद्रोह में भोपाल की सिकन्दर जहाँ बेगम ने कर्नल ड्यूरेण्ड, कर्नल स्टाकतो ट्रेर्बन, कैप्टन लुडओ तथा कोब को शरण दी थी।
    
मध्यप्रदेश : 1857 ई की क्रांति



●महू में 1 जुलाई, 1857 को शआदत खाँ के नेतृत्व में विद्रोह प्रारंभ हुआ, किन्तु ब्रिगेडियर स्टुअर्ट ने इस विद्रोह का दमन कर दिया। 4 अप्रैल, 1858 को झाँसी पर सर  यूरोज ने आक्रमण किया जिसमें झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने तात्या टोपे के साथ मिलकर ग्वालियर पर अधिकार कर लिया।

 17 जून 1858 में रॉयल आयरिश के विरुद्ध युद्ध करते हुए रानी लक्ष्मीबाई अपनी अगरका झलकारी बाई के साथ ग्वालियर के समीप (कोटा की सराय) में गति को प्राप्त हो गयी।

1857 ई. के महान योद्धा तात्या टोपे (मूल नाम रामचन्द्र पाण्डुरंग ने अपनी छापामार रणनीति से अंग्रेजों को क्षति पहुंचाई। तात्या टोपे को महाराष्ट्र का कहा जाता है। तात्या टोपे को सिविधा के एक सामंत मानसिंह ने मंत्रपूर्वक अंग्रेजों के द्वारा चन्द बनवा दिया गया और 18 अप्रैल, 1859 को उन्हें शिवपुरी में फाँसी दे दी गई।
तात्या टोपे


मध्यप्रदेश : 1857 ई. की क्रांति के प्रमुख विद्रोही

विद्रोही                                  सम्बंधित स्थल


◆तात्या टोपे (भारतीय चीते )         कानपुर-झाँसी-                                                               ग्वालियर   

◆रानी लक्ष्मीबाई                          झाँसी काल्पी   

◆टाट्या भील                                 खरगोन

◆शंख रमजान                               सागर 

◆झलकारी बाई
(लक्ष्मीबाई की अंगरक्षिका)            झाँसी

◆राजा ठाकुर प्रसाद                     राधवगढ़

◆नारायण सिंह                          रायपुर

सआदत खान                          महू

◆रानी अवन्तीबाई                      रामगढ़

◆भीमा नायक                          मंडलेश्वर ( उज्जैन)

◆गिरधारी बाई
(अवन्तीबाई की अंगरक्षिका)       रामगढ़

◆शंकर शाह                            गढ़ा मंडला

◆श्री बहादुर                                   मंडला

◆देवी सिंह                                    मण्डला

◆सुरेन्द्र भाई                                  सम्बलपुर

◆डेलनशाह                                   नरसिंहपुर

◆बख्तावर सिंह                           धार (मालवा क्षेत्र)


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