धारवाड़ चट्टान (Dharwar Rock)
धारवाड़ क्रम की चट्टानों का निर्माण आर्कियन नीस और शिस्ट शैलों के अनाच्छावन (Denudation) और अपरदन (Erosion) से प्राप्त अवसादों (Sediments) के निक्षेप (Deposit) से हुआ है।
सर्वप्रथम इन चट्टानों की खोज कर्नाटक के धारवाड़ जिले में की गई थी। ब्रुसफूट (Bruce Foote) द्वारा इन चट्टानों का नाम धारवाड़ (Dharwar) रखा गया है।
धारवाड़ क्रम की चट्टानों में स्लेट, शिस्ट, नीस ग्रेनाइट, फाइलाइट एवं क्वार्ट्जाइट आदि खनिजों की प्रधानता होती है।
ये चट्टाने जीवाश्म रहित होती है, परन्तु इनका आर्थिक महत्व अधिक होता है, क्योंकि इसमें कोबाल्ट, मैंगनीज, अभ्रक, क्रोमियम आदि के निक्षेप पाए जाते हैं।
मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्व में धारवाड़ क्रम की चट्टानों का विस्तार 3 समूहों में पाया जाता है
धारवाड़ क्रम की चट्टानें
1. चिल्पी क्रम
2. सकोली क्रम
3. सौसर क्रम
चिल्पी क्रम (Chilpi Series) . चिल्पी क्रम की चट्टानों का विस्तार मध्य प्रदेश के बालाघाट ,जबलपुर तथा छिदवाड़ा जिलों में पाया जाता है। इन चट्टानों में फाइनाइट, क्वार्टजाइट, ग्रीन स्टोन तथा मैगनीज आदि के निक्षेप पाये जाते हैं।
क्लोजपेट क्रम (Closepet series)
इन चट्टानों का विस्तार मध्य प्रदेश के बालाघाट तथा छिंदवाड़ा जिलों में पाया जाता है।
●क्लोजपेट कम की चट्टानों में क्वार्ट्जाइट मैगनीज तथा कॉपर के पायराइट जाते हैं।
• बालाघाट जिले में स्थित मलाजखण्ड (Malajkhand) ताँबे के वृहद भण्डार पाये जाते हैं। 【IMP Questions】
2. सकोली क्रम (Sako Series)
सकोली क्रम की चट्टानों का विस्तार मध्यप्रदेश राज्य के जबलपुर जिले में पाया जाता है। इसमें अभ्रक, शिस्ट तथा संगमरमर आदि के निक्षेप पाये जाते हैं। यहां सर्वोच्च गुणवत्ता का संगमरमर प्राप्त है।
3. सौसर क्रम (Sausar Series)
इसका विस्तार महाराष्ट्र के नागपुर से मध्यप्रदेश छिंदवाड़ा जिले तक एक पट्टी के रूप में पाया है। इसमें अभ्रक, शिस्ट, संगमरमर, क्वार्टजाइट अधिकता पायी जाती है।
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