गोडवाना क्रम की चट्टाने
(Gondwana System of Rocks)
गोंडवाना क्रम की चट्टाने परतदार अवसादी चट्टाने है। इनका निर्माण मध्य कार्यानीफेरस काल से जुरैसिक काल के अन्तिम चरण तक द्रोणी बेेसिनो में अवसादों तथा चट्टानों के वृहद निक्षेपण से हुआ है। भूगर्भिक हलचलों के कारण इस क्षेत्र के सघन वन मलबे के रूप में नीचे दब गये, जिनके अवसादीकरण के कारण कोयले का निर्माण हुआ।
इन चट्टानों का अध्ययन सर्वप्रथम मध्य प्रदेश (दक्षिण-पूर्व) के प्राचीन गोंड राज्य में किया गया था। इसी आधार पर इन चट्टानों का नाम गोडवाना (Garidwana) रखा गया।
मध्य प्रदेश राज्य में गोंडवाना क्रम की चट्टानों में निम्न उपक्रम अथवा अवस्थाएँ पायी जाती है -
1. निचला गोंडवाना क्रम -
(अ) तालचेर उपक्रम
2. ऊपरी गोंडवाना क्रम-
(अ) महादेव उपक्रम
( ब) जबलपुर उपक्रम
निचला गोंडवाना उपक्रम (Lower Gondwana System)
तालचेर उपक्रम (Talcher Series)
इसका नामकरण ओडिशा के अंगुक्त जिले में स्थितः तालचेर के नाम पर किया गया है। यहाँ कोयले के वृहद भण्डार है, जो ब्राह्मणी नदी घाटी क्षेत्र में स्थित है। इस उपक्रम के कोयले का विस्तार मध्य प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में स्थित सिंगरौली, सीधी तथा शहडोल आदि जिलों में पाया जाता है। ये शैलें जीवाश्मयुक्त होती हैं।
ऊपरी गोंडवाना क्रम (Upper Gondwana System)
महादेव उपक्रम (Mahadev Stries)
महादेव उपक्रम को पचमढ़ी उपक्रम के नाम से भी जाना
जाता है। पचमढ़ी, सतपुड़ा श्रेणी में स्थित है। महादेव उपक्रम में कोयले के भण्डार उपस्थित है, जिनका विस्तार छिंदवाडा, नरसिंहपुर तथा सिवनी आदि जिलों में पाया जाता है।
इसे दो अवस्थाओं में विभाजित किया गया है -
पचमढ़ी तथा मलेरी ।
जबलपुर उपक्रम ( Jabalpur Series )
इस उपक्रम का विकास मध्य प्रदेश के कटनी तथा जबलपुर के क्षेत्रों में हुआ है।
इसकी दो अवस्थाएँ पायी जाती है -
निचला चौगान तथा ऊपरी जबलपुर
इस उपक्रम में जुरैसिक काल की वनस्पतियों के अवशेष पाये आते है। इस क्षेत्र में लिग्नाइट कोयले के साथ-साथ कांग्लोमरेट, बलुआ पत्थर, चूना पत्थर तथा शैल आदि के अवक्षेप पाये जाते हैं।
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