आध महाकल्प/आर्कियन समूह (anrchean System)
आर्कियन का शाब्दिक अर्थ है, सर्वाधिक प्राचीन। इस समूह की चट्टाने प्रायद्वीपीय भारत के दो तिहाई भाग में राजस्थान से कन्याकुमारी तक विस्तृत हैं। मध्य प्रदेश के उत्तर व उत्तर-पश्चिम तथा पूर्वी भाग में आर्कियन चट्टानों का विस्तार अधिक है। इन चट्टानों में मुख्यत: में ग्रेनाइट, चानोंकाइट ( Charnockite) शिस्ट तथा नीस (Gneiss) आदि खनिज पाये जाते हैं।
आर्कियन चट्टानों का निर्माण
◆ द्रवित पदार्थ के शीतलन और दृढ़ीकरण या घनीभवन
(Solidification) से।
◆ आद्य सागरों में संग्रहित प्रथम अवसादो शिलाओं के रूप में इनका तापीय तथा प्रादेशिक रूपान्तरण हुआ है।
. मैग्मा अथवा लावा के अंतर्भेद (Intrusive) या उद्भेदन के पश्चात् रूपान्तरण के फलस्वरूप शिस्ट एवं नी जैसी चट्टानों का निर्माण हुआ है।
आर्कियन चट्टानों का रूपान्तरण इतना अधिक हुआ है कि, इनकी मूल विशेषताएँ लगभग समाप्त हो चुकी हैं। ये चट्टानें जीवहीन (Azoic) एवं जीवाश्म रहित होती हैं, इससे प्रमाणित होता है कि इनके विकास के समय पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व नहीं था। ये आर्कियन चट्टानें अत्यधिक आकुचित हैं, क्योंकि ये प्रशित एवं शल्कित (Follated) अवस्था में हैं। इनमें मुख्य रूप से नीस, शिस्ट, ग्रेनाइट, फाइलाइट खोन्डेलाइट, पेग्मेटाइट, संगमरमर तथा क्वार्ट्जाइट आदि खनिजों के निक्षेप पाये जाते हैं। रुपान्तरण के कारण ग्रेनाइट, नीस में परिवर्तित हो जाता है। जिसे बंगाल गुम्बद अथवा गुम्बद नाइस (Dome Gneiss) कहते हैं। इसकी संरचना शल्कि (Foliated) तथा पट्टी के रूप में पायी जाती है। इसलिए इन्हें पैतृक चट्टाने अथवा प्राथमिक चट्टाने (Primary Rocks)
भी कहते हैं।
प्रायद्वीपीय नीस
प्रायद्वीपीय नीस एक प्रमुख आर्कियन चट्टान है, इन्हें कणों के आधार पर बुन्देलखण्ड नौस तथा चार्नोकाइट नीस आदि नामों से भी जाना जाता है।
बुन्देलखण्ड नीस :
यह आर्कियन क्रम की चट्टान से निर्मित है, जिसके कणों का आकार वृहत् (Macro) होता है। यह ग्रेनाइट के समान दिखाई पड़ती है। इसका विस्तार मध्य प्रदेश के अतिरिक्त महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु तथा आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में हुआ है।
चार्नोकाइट नीस :
इन चट्टानों के कणों का आकार सूक्ष्म (Micro) होता है। इन चट्टानों को नीलगिरी नोस भी कहते हैं, क्योंकि इसका रंग गहरा तोला से भूरा होता है। इसका नामकरण कोलकाता के संस्थापक जॉब चानोंक के नाम पर किया गया है। चार्मोकाइट नोस का विस्तार मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा झारखण्ड आदि राज्यों में हुआ है।
आर्कियन समूह की चट्टानें खनिज सम्पदा की दृष्टि से भारत की सबसे समृद्ध चट्टानें हैं। इनमें धात्विक,अधात्विक खनिजों के अतिरिक्त दुर्लभ खनिज (Rare Mineral), बहुमूल्य रल, तांबा, मैगनीज, लोहा ,अभ्रक आदि के निक्षेप पाये जाते हैं।
इन्हें भी देखे

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