◆ नर्मदा नदी ( रेवा ) ◆
नर्मदा नदी को "मध्यप्रदेश की जीवन रेखा" कहते हैं।
इसे 'रेवा' के नाम से भी जाना जाता है, यह मध्य भारत की एक प्रमुख नदी हैं और भारतीय उपमहाद्वीप की पांचवीं सबसे लंबी नदी है। यह गोदावरी नदी और कृष्णा नदी के बाद भारत के अंदर बहने वाली तीसरी सबसे लंबी नदी है। यह उत्तर और दक्षिण भारत बीच एक पारंपरिक सीमा की तरह कार्य करती है। यह अपने उद्गम से पश्चिम की ओर 1312 किमी चल कर खंभात की खाड़ी (अरब सागर) में गिर जााती हैं।
◆ नर्मदा नदी का उदगम :- नर्मदा कुण्ड अमरकंटक,
जिला - अनूपपुर
राज्य - मध्यप्रदेश
समापन - खम्भात की खाड़ी (अरब सागर)
उपनाम - मध्यप्रदेश की गंगा, मध्यप्रदेश की जीवन रेखा
बहाव - कुल 1312 किमी (म. प्र. में 1022किमी )
सहायक नदी - कुंदी, शेर , हिरन , दुधी ,
हथनी , बंजर , शक्कर आदि।
किनारे बसे प्रमुख शहर - होशंगाबाद , जबलपुर , महेश्वर ,औंकारेश्वर आदि।
दर्शनीय स्थल - कपिलधारा , दुग्धधारा, सहस्त्रधारा,भेड़ाघाट आदि।
◆प्रमुख परियोजना
● रानी अवन्तिबाई सागर बरगी परियोजना (जबलपुर बिजौरा)
● सरदार सरोवर परियोजना (गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सयुंक्त परियोजना )
● इन्दिरा गांधी नर्मदा सागर परियोजना - खण्डवा (पुनासा)
नर्मदा नदी का उद्गम मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वतश्रेणियों के पूर्वी संधिस्थल पर स्थित नर्मदा कुण्ड,अमरकंटक से हुआ है।यह नदी पश्चिम की ओर सोनमुद से बहती हुई, एक चट्टान से नीचे गिरती हुई कपिलधारा जलप्रपात बनाती है घुमावदार मार्ग और प्रबल वेग के साथ घने जंगलो और चट्टानों को पार करते हुए रामनगर के जर्जर महल तक पहुँचती हैं। आगे दक्षिण-पूर्व की ओर, रामनगर और मंडला (25 किमी) के बीच, यहाँ जलमार्ग अपेक्षाकृत चट्टानी बाधाओं से रहित सीधे एवं गहरे पानी के साथ है। बंजर नदी बाई ओर से इसमे मिल जाती है। नदी आगे एक संकीर्ण लूप में उत्तर-पश्चिम में जबलपुर पहुँचती है। शहर के करीब, नदी भेड़ाघाट के पास करीब 9 मीटर का धुँआधार जल प्रपात बनाती हैं आगे यह लगभग 3 किमी तक एक गहरी संकीर्ण चैनल में मैग्नीशियम चूनापत्थर और बेसाल्ट चट्टानों जिसे संगमरमर चट्टान भी कहते हैं के माध्यम से बहती है, यहाँ पर नदी 80 मीटर के अपने पाट से संकुचित होकर मात्र 18 मीटर की चौड़ाई के साथ बहती हैं। आगे इस क्षेत्र से अरब सागर में अपनी मिलान तक, नर्मदा उत्तर में विंध्य पट्टियों और दक्षिण में सतपुड़ा रेंज के बीच तीन संकीर्ण घाटियों में प्रवेश करती है। घाटी का दक्षिणी विस्तार अधिकतर स्थानों पर फैला हुआ है।
संगमरमर चट्टानों से निकलते हुए नदी अपनी पहली जलोढ़ मिट्टी के उपजाऊ मैदान में प्रवेश करती है, जिसे "नर्मदाघाटी" कहते हैं। जो लगभग 320 किमी (1988 मील) तक फैली हुई है, यहाँ दक्षिण में नदी की औसत चौड़ाई 35 किमी हो जाती है। संगमरमर चट्टानों से निकलते हुए नदी अपनी पहली जलोढ़ मिट्टी के उपजाऊ मैदान में प्रवेश करती है, जिसे "नर्मदाघाटी" कहते हैं। जो लगभग 320 किमी (1988 मील) तक फैली हुई है, यहाँ दक्षिण में नदी की औसत चौड़ाई 35 किमी हो जाती है। वही उत्तर में, बर्ना-बरेली घाटी पर सीमित होती जाती है जो की होशंगाबाद के बरखरा पहाड़ियों के बाद समाप्त होती है। हालांकि, कन्नोद मैदानों से यह फिर पहाड़ियों में आ जाती हैं। यह नर्मदा की पहली घाटी में है, जहां दक्षिण की ओर से कई महत्वपूर्ण सहायक नदियाँ आकर इसमें शामिल होती हैं और सतपुड़ा पहाड़ियों के उत्तरी ढलानों से पानी लाती हैं। जिनमे: शेर, शक्कर, दुधी, तवा (सबसे बड़ी सहायक नदी) और गंजल साहिल हैं। हिरन, बारना, चोरल, करम और लोहर, जैसी महत्वपूर्ण सहायक नदियां उत्तर से आकर जुड़ती हैं।
हंडिया और नेमावर से नीचे हिरन जलप्रपात तक, नदी दोनों ओर से पहाड़ियों से घिरी हुई है। इस भाग पर नदी का चरित्र भिन्न दिखाई देता है। ओंकारेश्वर द्वीप, जोकि भगवान शिव को समर्पित हैं, मध्य प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण नदी द्वीप है। सिकता और कावेरी, खण्डवा मैदान के नीचे आकर नदी से मिलते हैं। दो स्थानों पर, नेमावर से करीब 40 किमी पर मंधार पर और पंसासा के करीब 40 किमी पर ददराई में, नदी लगभग 12 मीटर (39.4 फीट) की ऊंचाई से गिरती है।
बरेली के निकट कुछ किलोमीटर और आगरा-मुंबई रोड घाट,
राष्ट्रीय राजमार्ग 3, से नीचे नर्मदा मंडलेश्वर मैदान में प्रवेश करती है, जो कि 180 किमी लंबा है। बेसिन की उत्तरी पट्टी केवल 25 किमी है। यह घाटी सहस्त्रधारा धारा जल-प्रपात पर जा कर ख़त्म होती है।
मकरई के नीचे, नदी बड़ोदरा जिले और नर्मदा जिला के बीच बहती है और फिर गुजरात राज्य के भरूच जिला के समृद्ध मैदान के माध्यम से बहती है।गुजरात के भरुज में सरदार सरोवर बाँध स्थित हैं इसमे भारत के लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की भव्य प्रतिमा (182m) स्थित हैं यहाँ नदी के किनारे, सालो से बाह कर आये जलोढ़ मिट्टी, गांठदार चूना पत्थर और रेत की बजरी से पटे हुए हैं। नदी की चौड़ाई मकराई पर लगभग 1.5 किमी, भरूच के पास और 3 किमी तथा कैम्बे की खाड़ी के मुहाने में 21 किमी तक फैली हुई बेसीन बनाती हुई अरब सागर में विलिन हो जाती है।




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