मध्यप्रदेश में विन्ध्यन क्रम की चट्टानें
(Rocks of Vindhya order in Madhya Pradesh)-gk in hindi
निचला विन्ध्यन क्रम (Lower Vindhryan System)
सेमरी उपक्रम (Semri Series)
यह निचले विन्ध्यन क्रम की चट्टानों का एक उपक्रम है, जिसका अधिकांश विस्तार मध्य प्रवेश के उत्तर-पूर्व में सोन नदी धाटी में हुआ है। इस क्षेत्र में बलुआ पत्थर , चूना पत्थर तथा शैल आदि निक्षेप पाये जाते है। कच्चे माल की उपलब्धता के कारण इस क्षेत्र में समेन्ट उद्योग का विकास हुआ है।
निचले विध्यन में वलय (Folds) और अंश (Faults) अधिक पाये जाते हैं। दमोह और सागर जिलों के दक्षिण में विस्तृत क्षेत्रों में गुम्बदाकार उच्च भूमियों एवं घाटियाँ जाती है।
ऊपरी विध्यन क्रम (Upper Vindhyan System)
इसका विकास निचले विध्यम क्रम की चट्टानों के बाद हुआ है। ऊपरी विध्यन क्रम की की चट्टानों का निर्माण ज्वारन्दमुख तथा नदियों की घाटियों में हुआ है। इसमें बलुआ पत्थर, शेल तथा कांग्लोमरेट चट्टानों की परते पायी जाती है।
इसको तीन उपक्रमों में विभाजित किया है .
कैमूर उपक्रम (Kaimur Series)
इस उपक्रम का विस्तार मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा बिहार राज्यों में हुआ है। इसका सबसे अधिक विकास बुन्देलखण्ड और बधेलखण्ड के क्षेत्रों में हुआ है। इसमें मुख्य रूप से बलुआ,पत्थर ,शेल तथा कांग्लोमोट चट्टाने पायी जाती है।
राज्य में कैमूर उपक्रम का विस्तार पन्ना, सतना तथा रीवा जिलों में हुआ है। पन्ना जिले के पूर्वी भाग (बुन्देलखण्ड) में ग्रेनाइट चट्टानें पाई जाती हैं। पुलकोवा पहाड़ी के निकट स्थित केन एवं अन्य नदियों ने कगारों का निर्माण किया है इन कगारों से कांलोमरेट चट्टानें दिखाई पड़ती है। इनसे शैल और क्वॉर्टजाइट के निक्षेप पाये जाते हैं गृह निर्माण में किया जाता है। जिनका उपयोग गृहनिर्माण में किया जाता है।
रीवा उपक्रम (Rewa Series)
इसका विस्तार कैमूर उपक्रम के उत्तर-पश्चिम में सागर, पन्ना तथा तमोह आदि जिलों में पाया जाता है। इस के मध्य में प्रयागराज (इलाहाबाद) से कटनी (मध्यप्रदेश) के मध्य रेल लाइन गुजरती है। इसमें उपस्थित बलुआ पत्थर की दो अवस्थाएँ पाये जाती हैं. इसके निचले शेल को पन्ना शेल और ऊपरी शेल को झिरी शेल (राजगढ़ किला) कहते हैं। पन्ना क्षेत्र से हीरा प्राप्त किया जाता है। .
इसके कण मध्यम से बड़े आकार के होते हैं एवं इनका रंग गुलाबी व बैगनी होता है। बड़े आकार में कणों की उपस्थिति के कारण यह अनुमान लगाया जाता है कि रीवा उपक्रम के निर्माण के समय जलवायु शुष्क रही होगी। इसमें बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, शेल आदि के निक्षेप जाते हैं जिनका उपयोग सीमेन्ट और शीशा उद्योग में किया जाता है।
भाण्डेर उपक्रम (Bhander Series)
भाण्डेर उपक्रम का विस्तार विध्यन श्रेणी के पश्चिम में सतना, सागर तथा दमोह जिलों के पठारी भागों में पाया जाता है।
इस उपक्रम की दो अवस्थाएँ है -
● गानौरगढ़ (Ganurgarti Shale)
● सिरबू शेल (Sirbu Shale)
इस उपक्रम की चट्टनों में चूना पत्थर, बलुआ पत्थर, बलुआ पत्थर तथा शेल के निक्षेप पाये जाते हैं। इस क्षेत्र में सूक्ष्म से मध्यम आकार के कण गुलाबी व बैगनी पत्थरों के पत्थरों के निक्षेप पाये जाते हैं जिनका उपयोग गृह निर्माण में सीमेंंट उद्योग में किया जाता है।
. विध्यन क्रम की चट्टानों में दरार और भ्रंश अधिक पाये जाते हैं। इन्हीं भ्रंशों तथा दरारों में आर्कियन चट्टाने है अवसादों के निक्षेप से इन चट्टानों का निर्माण हुआ। इनके संस्तर क्षैतिज अवस्था में पाये जाते हैं।
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