Beginning of Gandhian era (गांधी युग की शुरुआत )
महात्मा गांधी
●जन्म-02 अक्टूबर 1869 को पोरबन्दर में हुआ।
●1893 ई में ये डरबन चले जाते हैं एक वर्ष के लिये किसी परिचित की कानूनी समस्याओं के समाधान के लिए पर अफ्रीका पहुंचते ही जब एक गोरा व्यक्ति ने गोरे काले के भेदभाव के कारण उन्हें ट्रेन से नीचे उतार देता है तो वहाँ गोरे इस भेदभाव को मिटाने के लिए 22 साल अफ्रीका में गुजारते हैं।
● अफ्रीका में सत्याग्रह के बल पर भेदभाव मिटाने के पश्चात गाँधी जी 9 january 1915 ई को भारत पहुँचते हैं और पूरे भारत के भ्रमण पर निकल जाते हैं।
● 1916 के होमरूल आंदोलन में भी गांधीजी भाग नहीं लेते क्योंकि इनका कहना था कि जो कुछ मिलेगा केवल सत्याग्रह से मिलेगा।
गाँधी जी के आंदोलन की शुरुवात
◆TRICK. -गाँधी जी ने Cake काटा।
1 C - चम्पारण आंदोलन 1917ई -- चम्पारण (बिहार) में अंग्रेजों द्वारा किसानों को जबरदस्ती नील की खेती करवाने के विरुद्ध गाँधी जी सत्याग्रह करते हैं। वहाँ उन्हें अपनी पहली सफलता मिलती है और अंग्रेजी सरकार को झुकना पड़ता है।
2 .A - अहमदाबाद (1918ई) में मिल कर्मचारी वेतन वृद्धि की माँग काफी समय से कर रहे थे गाँधी जी संघर्ष कर उन्हें 35% वेतन वृद्धि दिला देते हैं।
3. K-खेड़ा सत्याग्रह (1918 ई) खेड़ा में किसानों से जबरदस्ती लगान रुकवाकर गांधी जी तीसरी फतह प्राप्त करते हैं।
रॉलेक्ट एक्ट 1919 ई
मार्च 1919 में अंग्रेजी सरकार एक आदेश लाती है जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को बिना ट्रायल के गिरफ्तार किया जा सकता है।
■ इसके विरोध में गाँधी जी 6 अप्रैल 1919 को रॉलेट सत्याग्रह की शुरुवात करते हैं।
■ 13 अप्रैल 1919 को हज़ारों लोग रॉलेट एक्ट के विरोध में अमृतसर में इकट्ठा होते हैं। जिन पर जनरल डायर गोलियां बरसा देता है और सैंकड़ों लोग मारे जाते हैं।
● इससे आहत होकर 18 अप्रैल 1919 को गाँधी जी आंदोलन स्थगित कर देते हैं। इस भीषण नरसंहार को जलियांवाला हत्या कांड के नाम से जाना जाता है |
खिलाफत आंदोलन 1919ई
◆ 1919 ई में गांधी जी के नेतृत्व में खिलाफत आंदोलन की शुरुआत हुई|
असहयोग आंदोलन (01 अगस्त 1920)
■ 01 अगस्त 1920 ई को गाँधी जी असहयोग आंदोलन की शुरुवात करते हैं। जिसमे सभी विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया जाता है।
■ पर 04 फरवरी 1922 को गोरखपुर के चौरा-चौरी नामक स्थान पर भीड़ द्वारा पुलिस स्टेशन पर हमला किया गया, जिसमे 22 पुलिसवाले मारे गए, इन्हीं हिंसक घटनाओं के चलते गाँधी जी असहयोग आंदोलन वापिस ले लेते हैं।
साइमन कमीशन
03 फरवरी 1928 ई को भारत में सैंविधानिक बदलाव करने हेतु सर् जॉन साइमन की अगुवाई में अंग्रेजो का सात सदस्यीय दल भारत आता है।
पूरे भारत में इसका विद्रोह हो जाता है और साइमन गो बैक के नारे दिये गये|
गाँधी जी का 11 सूत्रीय कार्यक्रम
■ गाँधी जी लार्ड इरविन को 31 जनवरी 1930 तक का समय देते है कि या तो ये 11 मांगे पूरी करो नहीं तो सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया जाएगा।
1. सैनिकों पर खर्च 50% कम करो।
2. शराब बंद की जाए।
3.CID की पावर कम करो।
4. शस्त्र कानून में बदलाव हो ।
5. लीडर्स को रिहा किया जाए। 6. कपड़ा उधोग प्रोटेक्ट करो। 7. लोगों को सुरक्षा के लिये शस्त्र लाइसेंस दिए जाएं।
8. रुपया और स्टर्लिंग के बीच स्थानांतरण अनुपात कम हो
9. भू कर 50% कम किया जाए।
10. नमक कर खत्म किया जाए।
11. प्रशासनिक खर्च कम किया जाए।
■ पर लार्ड इरविन इनकी कोई मांग नहीं मानने के लिए राजी नही थे ।
सविनय अवज्ञा आन्दोलन
दांडी यात्रा : 12 मार्च 1930 को गाँधी जी दांडी यात्रा शुरू करते है और 06 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ते हैं।
पूरे भारत में धीरे-धीरे अंग्रेजी हकूमत के प्रत्येक आदेश का बहिष्कार किया जाता है। मई 1930 को गाँधी जी को गिरफ्तार कर लिया गया ,पर। इसके बाबजूद आंदोलन जारी रहता है।
गाँधी - इरविन समझौता
■ 05 मार्च 1931 को गाँधी और वायसराय इरविन के बीच समझौता हो जाता है और कुछ मांगे मान ली जाती हैं।
■ 26 मार्च 1931 को दूसरे गोलमेज सम्मेलन में जब सरकार मांगों से मुकर जाती है तो 29 दिसंबर 1931 को गांधी जी फिर से सविनय अवज्ञा आंदोलन की घोषणा कर देते हैं।
● 1932 को गिरफ्तार कर लेती है जिसके कारण इसका अत्यधिक प्रसार नहीं होता।
अगस्त ऑफर( प्रस्ताव) और व्यक्तिगत सत्याग्रह
■ 1940 ई में वायसराय लिथिंगलो भारत को अधीन राज्य (Dominion status) का दर्जा देने का ऑफर देता है। पर गांधी जी पूर्ण स्वराज पर अड़े रहते हैं। जिस पर सहमति नहीं बन बाती ।
■ इस पर नाराज होकर गाँधी जी व्यक्तिगत सत्याग्रह की घोषणा कर देते हैं। जिसकी शुरुआत विनोबा भावे करते हैं। साथ में पंडित जवाहर लाल नेहरू और ब्रह्मदत्त भी जुड़ जाते हैं ।
क्रिप्स मिशन और भारत छोड़ो आंदोलन
■ मार्च 1942 को स्टैफ़ोर्ड क्रिप्स दल भारत आता है और पुन: dominion status (अधीन राज्य) का प्रस्ताव रखता है। जिस पर गाँधी कहते हैं कि ये तो बाद कि तिथि का चेक है जो हमारे किसी काम का नहीं।
■ 08 अगस्त 1942 को व्यथित होकर गाँधी जी भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुवात कर देते हैं और अबकी बार 'करो या मरो' का नारा देते हैं।
■ 09 अगस्त 1942 को ही सभी प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जाता है पर इस बार आंदोलन नहीं रुक|
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