Motivational best shayari
महमूद तुर्क, मंगोल, तैमूर ने चुराया था सोना
मंदिर जला दिए, मेरे इतिहास छिन्न भिन्न किये
मैं फिर भी अतिथि देवो भवः का गीत गाता रहा मुझे वेदों की ऋषाओं ने जन्मा हू
अखण्डता, भाईचारे मैं पनपा हू
मेरे परिचय के लिए इतना ही पर्याप्त है।
कि अमृत स्वरूप गंगा मेरी माँ है।
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����❤️❤️
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